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कटनी मंडी में भ्रष्टाचार का सिंडिकेट, मंडी शुल्क घोटाले का खुलासा..सचिव की भूमिका संदिग्ध

शुल्क चोरी का खेल, मंडी कर्मियों की मिलीभगत

*कटनी मंडी में करोड़ों का घोटाला, मंडी कर्मियों की घोटालेबाज हरकतें जारी*

 

कटनी। ढलते साल में भी मंडी कर्मियों की घोटालेबाज हरकतें नहीं सुधरी हैं। करोड़ों के मंडी शुल्क की चोरी का मामला सामने आया है। मंडी प्रवेश द्वार पर लगे मंडी कर्मी बाहर के राज्यों से आने वाले सब्जी, फलों, आदि के ट्रकों में लदे वास्तविक वजन से कम आंक कर लिख लेते हैं, जिससे एक ट्रक में लगभग 5 टन तक का खेल कर देते हैं।

न तो ट्रक वालों से कांटा पर्ची मांगी जाती है और न ही बिल्टी। इसके बाद आढ़तियों से बाद में अपना कमिशन ले लेते हैं। इस पूरे खेल में प्रवेश द्वार पर लगे गार्ड, गेट पास बनाने वाले कर्मी, और जिनके भरोसे इनकी जांच करने की जिम्मेदारी है, वो सब भी अपना हिस्सा लेकर खुश हैं।

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मंडी शुल्क में लाखों रुपयों का घोटाला कर रहे हैं और अपना काला धन जमा करने में लगे हैं। इसी तरह का खेल कृषि उपज मंडी में आने वाले वाहनों का भी है। मंडी में शुल्क वसूली करने के लिए तीन लोगों की टीम बनी हुई है, जिनमें से अधिकतर दो लोग ही सुबह 8 से 10 बजे तक के बीच में अपनी जेबें भर लेते हैं और मंडी शुल्क के लाखों के घोटाले को अंजाम दे रहे हैं।

इन वसूली कर्मियों में अनिल तिवारी और गौतम जी हैं, जो मंडी में आढ़तियों के साथ साठगांठ कर इस पूरे खेल को अंजाम दे रहे हैं। इस मंडी शुल्क घोटाले के पीछे मंडी सचिव की भूमिका भी संदिग्ध है। मंडी सूत्र बताते हैं कि इन क्रियाकलापों की जानकारी सचिव से लेकर प्रभारी और प्रतिनिधियों तक को है, परंतु सबका मौन समझ से परे है।

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सूत्र की मानें तो मंडी में रोजाना तीन से चार ट्रक तो केवल आलू के आते हैं। प्याज की गाड़ियां, फल पपीता, टमाटर की गाड़ियां तो रोजाना आती हैं, जिनमें छोटे लोडर पिकअप वाहनों की संख्या ज्यादा होती है। वहीं नारियल पानी, सेव, सकला, और भी महंगे फलों के ट्रक हफ्ते में आते हैं। कृषि मंडी में भी ट्रेक्टर आदि छोटे वाहनों से रोजाना सैकड़ों की संख्या में अनाज लदे वाहन आते हैं, परंतु इनकी निगरानी करने के लिए जो प्रवेश द्वार में सीसीटीवी कैमरा लगा हुआ है, वह खराब है।

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यहां प्रवेश करने वाले वाहनों से भी प्रवेश शुल्क के नाम पर अवैध वसूली मची है। यहां कंप्यूटर से पर्ची तो पांच रुपए की दी जाती है, लेकिन वसूले 10 रुपए से लेकर 20 रुपए तक जाते हैं। इन सब घटनाक्रमों से मंडी शुल्क की चोरी करने की शंका और तेज होती है। यदि प्रशासन उच्च स्तर पर इस घोटाले की जांच करवाए, तो दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा।

माननीय कटनी कलेक्टर और किसान हितैषी संगठनों, नेताओं को चाहिए कि वे इस इस ओर अपना ध्यानाकर्षण कर सरकारी “कर” की चोरी और किसानों के शोषण पर तत्काल विराम लगाएं और इस वृहद घोटाले की निष्पक्ष जांच करवा दोषियों पर कड़ी कार्रवाई करें।

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