विजयराघवगढ़ में फर्जी रजिस्ट्री का काला बाज़ार
गरीब परिवारों की पुश्तैनी जमीन निगल रहा लालच

दलालों अधिकारियों की कथित मिलीभगत उजागर
बालकिशन नामदेव संवाददाता निडर आवाज
कटनी. विजयराघवगढ़ क्षेत्र में जमीनों की रजिस्ट्री को लेकर फर्जीवाड़े का संगठित खेल तेजी से फैलता जा रहा है। पीड़ितों और ग्रामीणों का आरोप है कि भूमि रजिस्ट्री के नाम पर दलालों बिचौलियों और कुछ संबंधित कर्मचारियों की कथित मिलीभगत से ऐसा नेटवर्क खड़ा हो चुका है जो गरीबों की पुश्तैनी जमीनें तक हड़पने से पीछे नहीं हट रहा। सरकार के स्पष्ट नियमों के बावजूद रजिस्ट्री तभी वैध है जब दोनों पक्ष मौके पर मौजूद हों। भूमि पर वास्तविक फोटोग्राफी की जाए, सभी सह मालिकों की सहमति ली जाए लेकिन आरोप है कि इन नियमों की धज्जियाँ उडाते हुए एडिटिंग फोटो जोड़कर रजिस्ट्री पूरी कर दी जाती है।यह न केवल भ्रष्टाचार का चरम है बल्कि गरीबों के भविष्य पर खुला प्रहार।ग्राम हरैया की गुप्ता बाई लोधी, स्व. दिन लोधी, तथा मंगी बाई लोधी (छोटेलाल लोधी) ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि उनके पिता सूरजदीन लोधी की पुश्तैनी जमीन चोरी-छिपे, फर्जी फोटो लगाकर, बिना परिवार के एक महत्वपूर्ण पक्ष को बताए रजिस्टर्ड कर दी गई।
पीड़ित परिवार का आरोप है की वे मौके पर मौजूद ही नहीं थे फोटो वास्तविक नहीं बल्कि एडिटिंग का खेल था परिवार को सूचना तक नहीं दी गई पहचान व सहमति की प्रक्रिया पूरी तरह नजरअंदाज की गई।यह न सिर्फ नियमों का खुला उल्लंघन है, बल्कि गरीबों के लिए जीवन का सहारा छीन लेने जैसा अपराध है।हमारी जमीन ही हमारा जीवन थी… सब छीन लिया गुप्ता बाई लोधी ने कहा तीन परिवार इसी जमीन से वर्षों से पेट पालते रहे। दलालों ने पैसों के लालच में हमारी पुश्तैनी जमीन हड़प ली। यह सिर्फ अन्याय नहीं गरीब का गला घोंटने जैसा है। परिवारों का कहना है कि जब तक कानून सख्ती नहीं दिखाएगा गरीबों की जमीनें इसी तरह लालच का शिकार होती रहेंगी।
रजिस्ट्री प्रक्रिया कब होती है सही नियम जिनका खुलेआम उल्लंघन हो रहा है कानून के अनुसार दोनों पक्षों की मौके पर उपस्थिति भूमि पर खड़े होकर फोटो/वीडियो सभी उत्तराधिकारियों की लिखित सहमति पहचान दस्तावेजों की सख्त जांच संपत्ति का डिजिटल मिलान अधिवारी द्वारा भूमि व लगाई गयी फोटो का सत्यापन अनिवार्य होता है। इनमें से एक भी प्रक्रिया पूरी न होने पर रजिस्ट्री शून्य मानी जाती है।फिर भी आरोप है कि विजयराघवगढ़ में इन नियमों को महज औपचारिकता बनाकर छोड़ दिया गया है।
—कानून को अपनी जेब में भरने का खेल
ग्रामीणों का कहना है कि कुछ दलाल अपने संपर्कों के दम पर नकली फोटो झूठे बयान फर्जी सहमति जैसे हथकंडों से जमीन को मिनटों में बेच देते हैं, और बाद में पता चलता है कि जमीन तो किसी गरीब के नाम थी जिसके परिवार को इसकी भनक तक नहीं थी।ऐसे मामलों में कई बार अफसरों पर भी जांच और दंडात्मक कार्यवाही हो चुकी है जो बताता है कि व्यवस्था में कहीं न कहीं गंभीर कमी है।
*गरीब के सहारे पर प्रहार किसकी जिम्मेदारी?

पुश्तैनी जमीन ही गरीबों के लिए जीवनयापन का साधन परिवार का सुरक्षा कवच बच्चों का भविष्य होती है।और जब उसी जमीन को फर्जी कागजों में बेच दिया जाए, तो यह केवल ठगी नहीं, बल्कि गरीबी के खिलाफ संगठित अपराध है।पीड़ितों की मांग है की जांच हो, जमीन लौटे दोषियों पर कड़ी कार्रवाई हो पीड़ित परिवारों ने प्रशासन से मांग की है कि रजिस्ट्री की संपूर्ण जांच हो एडिट फोटो की तकनीकी जांच कराई जाए दलालों और संबंधित कर्मचारियों पर कठोर कार्रवाई हो और पुश्तैनी जमीन पीड़ितों को लौटाई जाए।

फर्जी रजिस्ट्री विजयराघवगढ़ के लिए बढ़ता हुआ खतरा यदि इस तरह का खुला फर्जीवाड़ा नहीं रुका तो आने वाले समय में न जाने कितने गरीब परिवार अपनी पुश्तैनी जमीन से बेदखल हो जाएंगेऔर विकास की जगह भ्रष्टाचार ही सबसे मजबूती से फलने-फूलने लगेगा।




