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कटनी अस्पताल में महिला को कंबल नहीं, प्लास्टिक की बोरी ओढ़नी पड़ी

प्लास्टिक की बोरियों में लिपटी न्याय की चीख: कटनी अस्पताल में महिला की दर्दनाक कहानी

कटनी जिला अस्पताल में मानवता शर्मसार: प्लास्टिक की बोरियों में लिपटी न्याय की चीख

बालकिशन नामदेव संवादाता 

कटनी। जिला अस्पताल में एक असहाय महिला मरीज को ठंड से बचने के लिए कंबल नहीं, बल्कि प्लास्टिक की खाली बोरियां ओढ़कर रात गुजारनी पड़ी। यह दृश्य इतना मार्मिक है कि देखने वालों की आंखें नम और दिल विद्रोह से भर गया।

सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो/फोटो ने सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की पोल खोलकर रख दी है। महिला 6 फरवरी को कोतवाली थाना क्षेत्र के सामने एक अज्ञात वाहन की टक्कर से गंभीर रूप से घायल हुई थी। राहगीरों की मदद से उसे जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। महिला के दोनों पैरों में गंभीर चोटें थीं और वह पिछले कई दिनों से जनरल वार्ड में भर्ती है।

प्रबंधन की सफाई या गैर-जिम्मेदारी पर पर्दा? मामला उजागर होने के बाद अस्पताल प्रबंधन ने दावा किया कि महिला की मानसिक स्थिति ठीक नहीं है और उसने कंबल फेंक दिया था। सवाल यह नहीं कि कंबल फेंका या नहीं — सवाल यह है कि क्या एक बीमार, घायल और असहाय महिला को प्लास्टिक की बोरियों में लिपटा छोड़ देना मानवता कहलाता है?

क्या यही है सरकारी अस्पताल की सेवा? स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों में इस घटना को लेकर गहरा आक्रोश है। लोगों का साफ कहना है कि “अगर जिला अस्पताल में एक महिला सुरक्षित नहीं, सम्मानित नहीं और संरक्षित नहीं है, तो आम आदमी की हालत का अंदाजा लगाया जा सकता है।”

दोषी डॉक्टर, नर्सिंग स्टाफ व प्रशासनिक अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग

मामले की उच्चस्तरीय जांच हो

अस्पतालों में मरीजों के लिए न्यूनतम मानवीय

– सुविधाओं की गारंटी सुनिश्चित की जाए

– इलाज सिर्फ दवा से नहीं, इंसानियत से भी होता है

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