क्रिसमस के दिन हिंदूवादी संगठनों का विरोध, देश की धर्मनिरपेक्षता पर हमला
हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई भाई-भाई के नारे को खंडित करने वालों पर कार्रवाई हो

क्रिसमस के दिन देशभर में ईसाई समुदाय के लोगों ने अपने धर्म के अनुसार पूजा-अर्चना की, लेकिन कुछ जगहों पर हिंदूवादी संगठनों ने विरोध प्रदर्शन किया। मध्य प्रदेश के जबलपुर में एक क्रिसमस प्रार्थना सभा में हिंदूवादी संगठनों ने धर्मांतरण का आरोप लगाते हुए हंगामा किया। इसी तरह उत्तराखंड के हरिद्वार में एक होटल में आयोजित क्रिसमस कार्यक्रम को रद्द करवा दिया गया ।

दिल्ली के लाजपत नगर में सांता की टोपी पहने महिलाओं और बच्चों के साथ हिंदूवादी संगठनों के लोगों ने बदतमीजी की। उत्तर प्रदेश के लखनऊ में एक चर्च के सामने हनुमान चालीसा का पाठ किया गया। छत्तीसगढ़ के रायपुर में एक मॉल में क्रिसमस की सजावट को तोड़ दिया गया ।

वहीं इन घटनाओं के बीच, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली के कैथेड्रल चर्च की प्रार्थना सभा में भाग लिया। उन्होंने ईसा मसीह की प्रतिमा के सामने हाथ जोड़कर श्रद्धा प्रकट की और क्रिसमस की शुभकामनाएं दीं। मोदी ने सोशल मीडिया पर लिखा, “दिल्ली में चर्च में क्रिसमस की सुबह की प्रार्थना में शामिल हुआ। यह सभा प्रेम, शांति और करुणा का शाश्वत संदेश देती है”।

तो सवाल उठता है कि जब देश के हिंदू हृदय सम्राट प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी तक ने कहा है की चर्च की प्रार्थना सभा प्रेम ,शान्ति और सद्भावना का संदेश देती है तो फ़िर ये कौन से तथाकथित हिंदू वादी संगठन है जिन्होंने चर्च के सामने भी हरकतें की?
हिंदूवादी संगठनों की इन हरकतों को देश की धर्मनिरपेक्षता पर हमला माना जा रहा है। हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई आपस में भाई-भाई के नारे को खंडित करने वालों पर देश के प्रधान सेवक को अवश्य कार्रवाई करने का साहस दिखाना होगा। इससे देश और विदेश में रहने वाले ईसाई समाज के लोगों को भी एक अच्छा संदेश पहुंच सकेगा।
क्या आपको लगता है कि ये घटनाएं धर्मनिरपेक्षता के मूल्यों को कमजोर करती हैं? क्या प्रशासन को इन घटनाओं पर कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए?




