कटनी में एमजीएम हॉस्पिटल का शॉकिंग मामला: कर्मचारियों को बंधक बनाने का आरोप
एमजीएम हॉस्पिटल प्रबंधन पर गंभीर आरोप, पुलिस में शिकायत

*एमजीएम हॉस्पिटल के मलिक और मैनेजर के द्वारा कर्मचारी को बंधक बनाने गंभीर आरोप*
बालकिशन नामदेव संवादाता
शहर से एक सनसनीखेज और गंभीर मामला सामने आया है, जहाँ एमजीएम हॉस्पिटल प्रबंधन पर अपने ही कर्मचारियों को घंटों बंधक बनाकर रखने के आरोप लगे हैं। 15 लाख रुपये की कथित हेराफेरी के शक के आधार पर अस्पताल प्रबंधन द्वारा की गई इस कथित गैरकानूनी कार्रवाई से पूरे शहर में हड़कंप मच गया है। पीड़ित युवक के परिजन न्याय की गुहार लेकर पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुँचे हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, एमजीएम हॉस्पिटल के संचालक दीपक गुप्ता और मैनेजर संजय तिवारी पर आरोप है कि उन्होंने अस्पताल के मेडिकल स्टोर में कार्यरत कर्मचारियों को एक कमरे में बंद कर घंटों तक मानसिक दबाव में रखा। पीड़ित पक्ष का कहना है कि यदि किसी प्रकार का संदेह था तो उसे कानूनी प्रक्रिया के तहत सुलझाया जा सकता था, लेकिन इसके बजाय कर्मचारियों को डराया-धमकाया गया और जबरन स्वीकारोक्ति का दबाव बनाया गया।
*23 दिसंबर से 24 दिसंबर तक अवैध रूप से कैद रखने का आरोप*
बरही थाना क्षेत्र के ग्राम मोहनी निवासी बालकिशन पटेल ने पुलिस अधीक्षक को सौंपे शिकायती आवेदन में बताया कि वे पिछले आठ वर्षों से एमजीएम अस्पताल के मेडिकल स्टोर में कार्यरत हैं। बालकिशन के अनुसार, 23 दिसंबर की दोपहर से 24 दिसंबर की रात करीब 11 बजे तक उन्हें और उनके तीन अन्य साथियों—यशवंत पटेल, राहुल पटेल और राहुल रजक—को अस्पताल प्रबंधन द्वारा अवैध रूप से बंधक बनाकर रखा गया।
शिकायत में कहा गया है कि चारों कर्मचारियों पर 60 लाख रुपये की चोरी का झूठा आरोप लगाया गया और प्रत्येक से 15-15 लाख रुपये देने का दबाव बनाया गया। आरोप है कि डर के माहौल में परिजनों ने अपनी जमीन की रजिस्ट्री अस्पताल प्रबंधन को सौंप दी, जिसके बाद कर्मचारियों को छोड़ा गया।
*मेडिकल स्टोर में फर्जी बिलिंग के भी आरोप*
बालकिशन पटेल ने अस्पताल की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि मेडिकल स्टोर में एक रुपये के सामान का फर्जी बिल 25 हजार रुपये तक बनाया जाता था। जब उन्होंने इस कथित गड़बड़ी का विरोध किया, तो उन्हें झूठे चोरी के मामले में फंसाने की धमकी दी गई।
पीड़ित बालकिशन ने कहा,
“मुझ पर और मेरे साथियों पर 15-15 लाख रुपये देने का दबाव बनाया जा रहा है। मेरी जमीन की रजिस्ट्री भी अस्पताल प्रबंधन के कब्जे में है। मैं पूरी तरह निर्दोष हूँ और मुझे साजिश के तहत फंसाया जा रहा है।”
*पुलिस ने शुरू की जांच*
मामले को लेकर पुलिस अधिकारियों का कहना है कि शिकायत प्राप्त हो चुकी है और इसकी गंभीरता से जांच की जा रही है। सभी संबंधित पक्षों के बयान दर्ज किए जाएंगे और तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।




