अवैध शराब बिक्री के विरोध में समाजवादी पार्टी उतरी सड़को पर, किया विरोध प्रदर्शन
सैकड़ों की संख्या में कलेक्ट्रेट के सामने दिया धरना

अवैध शराब के खिलाफ सपा का उग्र प्रदर्शन,
संवाददाता बालकिशन नामदेव
सैकड़ों आदिवासी महिलाओं के साथ कलेक्टर कार्यालय पहुंचे जिला अध्यक्ष डॉ. खान
कटनी। जिले के ग्राम प्यासी सलैया में लंबे समय से चल रही अवैध शराब बिक्री, बढ़ते अपराध और आदिवासी समाज पर हो रहे अत्याचारों के विरोध में समाजवादी पार्टी ने कड़ा रुख अपनाया है। समाजवादी पार्टी के कटनी जिला अध्यक्ष डॉ. खान के नेतृत्व में सैकड़ों आदिवासी महिलाएं और ग्रामीण सोमवार को कलेक्टर कार्यालय पहुंचे और पुलिस अधीक्षक महोदय को ज्ञापन सौंपते हुए निष्पक्ष कार्रवाई की मांग की।
ज्ञापन में बताया गया कि ग्राम प्यासी सलैया में खुलेआम अवैध शराब बेची जा रही है, जिसके कारण गांव का सामाजिक माहौल पूरी तरह बिगड़ चुका है। शराब के नशे में आए दिन विवाद, मारपीट और अपराध की घटनाएं बढ़ती जा रही हैं, लेकिन इसके बावजूद जिम्मेदारों द्वारा कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही है।
डॉ. खान ने आरोप लगाया कि गांव में एक अंधे व्यक्ति को जबरन शराब पिलाई गई, वहीं ग्रामीणों के साथ लगातार मारपीट की घटनाएं हो रही हैं। आदिवासी समाज के लोगों पर लगातार अत्याचार किया जा रहा है, जिससे महिलाओं और बच्चों में भय का माहौल बना हुआ है।
सपा जिला अध्यक्ष ने पुलिस पर भी गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि अवैध शराब के कारोबार को पुलिस प्रशासन की मिलीभगत से संरक्षण दिया जा रहा है। उन्होंने बताया कि ग्रामीणों से ₹5000 की अवैध वसूली किए जाने के आरोप भी सामने आए हैं। इसके अलावा निर्दोष आदिवासियों पर लगातार झूठे मुकदमे कायम किए जा रहे हैं, जिससे उन्हें मानसिक और आर्थिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि ग्रामीणों द्वारा कई बार शिकायत और आवेदन देने के बावजूद, तथा उपचार कराने के बाद भी प्रशासन द्वारा कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई है। इससे स्पष्ट होता है कि पूरे मामले में प्रशासनिक लापरवाही और उदासीनता बरती जा रही है।
समाजवादी पार्टी ने मांग की है कि ग्राम प्यासी सलैया में अवैध शराब बिक्री पर तत्काल रोक लगाई जाए, दोषी शराब माफियाओं के विरुद्ध सख्त कार्रवाई हो, आदिवासी समाज पर अत्याचार करने वालों और अवैध वसूली में संलिप्त पुलिसकर्मियों की निष्पक्ष जांच कर उन्हें दंडित किया जाए तथा झूठे मामलों को तत्काल निरस्त किया जाए।
प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में आदिवासी महिलाएं मौजूद रहीं, जिन्होंने प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी कर न्याय की मांग की। अब पूरे मामले पर जिला प्रशासन और पुलिस अधीक्षक द्वारा क्या कदम उठाए जाते हैं, इस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।




