कटनी मंडी घोटाला: किसानों का शोषण और भ्रष्टाचार की पराकाष्ठा
कटनी मंडी घोटाला: किसानों को न्याय दिलाने, एसआईटी जांच की मांग

मंडी में किसानों के दर्द: शोषण और भ्रष्टाचार की कहानी
कटनी मण्डी घोटाले की खबरें विगत बीते साल से चल रही है और अपने भ्रष्ट आचरण के लिए अखबारों की सुर्खियों बटोर रही है। मंडी के कमियों और उसके घोटालों पर लेखन कार्य किया जाए तो कलम की स्याही कम पड़ जाएगी। संभवतः प्रदेश की सबसे ज्यादा सुर्खिया प्राप्त करने वाली सब्जी मंडी कहा जाए तो अतिशयोक्ति नहीं होगी।

फिर भी कटनी कृषि मंडी में घोटालों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। किसानों का आरोप है कि मंडी प्रशासन और व्यापारियों की मिलीभगत से उनसे अतिरिक्त शुल्क वसूला जा रहा है।

एक किसान प्यारेलाल ने बताया, की कल वह मंडी में अनाज लेकर आया था। जहां”मुझे मंडी में अनाज बेचने के लिए कुल खर्च 40 रुपये प्रति क्विंटल आया है, जिसमें पल्लेदारी, तौलाई, और मंडी शुल्क शामिल है। यह खर्च बहुत अधिक है और हमारी आय को कम कर रहा है।”
किसानों का कहना है कि वे अपनी पीड़ा मीडिया से सुनाते हैं, खबरें भी प्रकाशित होती है लेकिन कलेक्टर साहब भी ध्यान नहीं देते हैं। उन्होंने माननीय कलेक्टर महोदय से अनुरोध किया है कि इस सुनियोजित तरीके से हो रहे मंडी घोटाले की एसआईटी बनाकर सघन जांच करवाई जाए ताकि इस पूरे घोटाले में शामिल अधिकारी, व्यापारियों की भूमिका भी उजागर हो सके।

अभी चालीस करोड़ रुपए के मंडी शुल्क घोटाले की आंच भी नहीं हुई ठंडी
इससे पहले भी कटनी मंडी में घोटाले के कई मामले सामने आए हैं। 2012 से 2022-23 तक निजी प्राइवेट थोक फल-सब्जी मंडी में बिना किसी टैक्स के करोड़ों रुपए का व्यापार चलता रहा। जिससे मंडी प्रशासन को करोड़ो का चूना लगाया गया है और जांच विचाराधीन है। वर्तमान हालात बताते है कि इस बड़े घोटाले की जांच भी ठंडे बस्ते में पड़ी हुई है। यदि उच्चतर जांच की जावे तो बड़े बड़े चेहरों से नकाब हट जाएगा।




