प्रदेश भर के मेलों से कहीं अधिक वसूल कर रही ग्राम पंचायत कन्हवारा
महाशिवरात्रि मेले में वसूली का खेल!

महाशिवरात्रि मेले में अव्यवस्था का बोलबाला, कन्हवारा पंचायत पर वसूली के आरोप
कटनी जिले के एक ग्रामीण मेले में पंचायत कन्हवारा द्वारा वाहनों से अधिक प्रवेश शुल्क वसूलने और रेट लिस्ट न टांगने की शिकायतें सामने आई हैं जिससे रोज ही मेले में आने वाले दर्शनार्थी जनों से विवाद हो रहा है, पंचायत ने अपनी कमाई के लिए मेले में आए लोगों , व्यापारियों को परेशान किया है, पंचायत ने अपने फायदे की लिए मेले में आए दुकानदार और दर्शनार्थी दोनों को परेशान किया हैं। विगत सालों की अपेक्षा इस बार पंचायत ने नई वसूली दरें लागू की है जो कि किसी भी तरह से उचित नहीं है।

पंचायत ने स्टैंड की नीलामी 50,000 रुपये में की है, लेकिन इसके बावजूद मेले में बिजली व्यवस्था, स्वच्छता, चलित शौचालय और पेय जल की व्यवस्था नहीं है। बिजली ठेके में 25,000 रुपये कमाने के बावजूद मेला प्रांगण में पावर सप्लाई के ट्रांसफार्मर नहीं लगाए गए हैं, जिससे झूले चलाने वाले जनरेटर का उपयोग कर रहे हैं जिससे उनको होने वाली कमाई डीजल खर्च में ही चली जाती है।

इनका कहना है
कटनी जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) प्रदीप सिंह का कहना है कि यदि नियम विरुद्ध वसूली की जा रही है तो जांच करवाई जाएगी। आज ही संबंधित अधिकारी को भेजकर दिखवाते है।
वैसे भी मेला प्रबंधन अधिकारी की कार्यप्रणाली शिथिल है, जिससे अव्यवस्था चरम सीमा पार कर चुकी है संभवतः पूरे प्रदेशभर में लगने वाले मेलों से कही अधिक वसूली कन्हवारा पंचायत कर रही है।

*सरपंच का बयान*
ग्राम पंचायत सरपंच रतन लाल आदिवासी का कहना है कि पंचायत सचिव अपनी मन मर्जी चला रहे हैं, मुझसे किसी भी तरह की राय मशवरा नहीं किया जाता है। और न ही मेरी इस पंचायत में कोई सुनवाई है, सचिव ने मेले से वसूली करने के लिए जो टीम बनाई है वो उनके स्वयं द्वारा निर्मित है उसमें भी मुझसे किसी तरह की कोई सलाह नहीं ली गई है । खैर ये कहना अतिशयोक्ति नहीं होगा कि रोज ही मेले की शान ए खिलाफ कृत्य घटित हो रहे है और प्रशासन दर्शक दीर्घा में बैठा हुआ है।
क्या आप जानना चाहते हैं कि कन्हवारा पंचायत की वसूली की दरें क्या हैं और क्या वे सही हैं? या आप मेला प्रबंधन अधिकारी की कार्यप्रणाली के बारे में अधिक जानकारी चाहते हैं?




