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‘गड्ढे चीख रहे हैं, अफसर सो रहे हैं’: कन्हवारा के पोड़ी-सहसपुरा में फिर शुरू हुआ आयरन ओर का अवैध खनन

रात के अंधेरे में JCB, दिन में मौन प्रशासन: सहसपुरा-पोड़ी में आयरन ओर माफिया बेलगाम, बीट गार्ड पर मिलीभगत के आरोप

कन्हवारा के सहसपुरा-पोड़ी में फिर शुरू हुआ अवैध उत्खनन: रात के अंधेरे में JCB से आयरन ओर की तस्करी, पटवारी-रेंजर दोनों मौन

 

*कटनी/कन्हवारा, 10 मई 2026।* कन्हवारा क्षेत्र के सहसपुरा और पोड़ी गांव में एक बार फिर अवैध उत्खनन का खेल शुरू हो गया है। रात के अंधेरे में JCB मशीनों से आयरन ओर पत्थर निकालकर बड़े-बड़े ट्रकों में भरकर तस्करी की जा रही है।

 

*नहर के रास्ते हो रही तस्करी*  

विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार मां काली मंदिर डिठवारा के आगे नहर के रास्ते से अंदर की तरफ खनन माफिया सक्रिय हैं। रोज रात को JCB लगाकर अवैध खनन किया जाता है और दर्जनों ट्रक आयरन ओर भरकर निकाले जा रहे हैं।

 

*पोड़ी ढलान में ताजा खनन, गड्ढे बने गवाह*  

ग्रामीणों का आरोप है कि कन्हवारा के नजदीक ग्राम पोड़ी की ढलान में विगत रात्रि ही बेजा उत्खनन किया गया है। मौके पर बने गहरे गड्ढे खुद इस अवैध कारोबार की गवाही दे रहे हैं। खेतों की मिट्टी उधड़ चुकी है और रास्ते खराब हो गए हैं।

 

*ग्रामीणों में दहशत और आक्रोश*  

लगातार हो रहे उत्खनन से क्षेत्र के ग्रामीणों में दहशत और आक्रोश है। ग्रामीणों का कहना है कि वन एवं खनिज अधिकारियों की मिलीभगत के बिना रात-रात भर JCB चलना और ट्रकों का आना-जाना संभव नहीं है। क्षेत्रीय बीट गार्ड की भूमिका पर भी ग्रामीण सवाल उठा रहे हैं।

 

*डिप्टी रेंजर बोले– ‘कल कराएंगे जांच’, पटवारी ने नहीं उठाया फोन*  

इस संबंध में वन विभाग कन्हवारा बीट के डिप्टी रेंजर अनिल मिश्रा से संपर्क किया गया। उन्होंने कहा, “अभी तेंदूपत्ता संग्रहण कार्य में व्यस्त हूं। कल ही सहसपुरा और पोड़ी दोनों ग्रामों के मामले की जांच करवाता हूं।”

 

वहीं राजस्व विभाग का पक्ष जानने के लिए पटवारी हल्का कन्हवारा रामगोपाल यादव से संपर्क करने का प्रयास किया गया, परंतु पटवारी ने फोन नहीं उठाया। पटवारी द्वारा लगातार मीडिया का फोन न उठाने से प्रशासन की उदासीनता साफ जाहिर होती है। खनिज विभाग के जिम्मेदारों से भी संपर्क नहीं हो सका।

 

*संपादकीय नोट:* खबर में सभी पक्षों से संपर्क का प्रयास किया गया है। पटवारी द्वारा जवाब न देना और रेंजर द्वारा ‘कल जांच’ कहना प्रशासनिक लापरवाही की तरफ इशारा करता है।

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