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धान बिक गई तो गेहूं क्यों नहीं?’: कटनी में कोटवारों के साथ धोखा, ‘शासकीय भूमि’ के नाम पर रोक, 181 भी बनी मूकदर्शक

कटनी में बंपर खरीदी का दावा फेल: कोटवारों की उपज लेने से इनकार, पोर्टल ब्लॉक,

कटनी में गेहूं खरीदी पर संकट: ‘शासकीय भूमि’ के फेर में उलझे कोटवार, पोर्टल ने रोका रास्ता, सीएम हेल्पलाइन भी बेअसर

 

कटनी (कन्हवारा): मध्य प्रदेश सरकार एक तरफ बंपर गेहूं खरीदी के दावे कर रही है, वहीं कटनी जिले के कन्हवारा और आसपास के क्षेत्रों के ग्राम कोटवार अपनी ही फसल बेचने के लिए दर-दर भटक रहे हैं। विडंबना यह है कि जिन कोटवारों ने कुछ महीने पहले अपनी धान की फसल इसी व्यवस्था के तहत बेची थी, उन्हें अब गेहूं खरीदी के समय ‘शासकीय भूमि की उपज’ का हवाला देकर सिस्टम से बाहर कर दिया गया है।

न धान जैसा न्याय, न गेहूं की तुलाई कन्हवारा के कोटवार मंजू श्याम दाहिया ने अपना दर्द साझा करते हुए बताया कि गांव के तीन कोटवारों की गेहूं की फसल केंद्र पर स्वीकार नहीं की जा रही है। अधिकारियों का तर्क है कि यह जमीन शासकीय है, इसलिए इसकी उपज सरकारी उपार्जन में नहीं ली जा सकती। कोटवारों का सवाल है कि “अगर यही जमीन धान खरीदी के समय वैध थी, तो गेहूं के समय अवैध कैसे हो गई?

पड़ोसी पंचायतों में भी यही हाल यह समस्या केवल कन्हवारा तक सीमित नहीं है। पड़ोसी ग्राम पंचायत खमतरा और पड़रिया के कोटवारों की भी यही स्थिति है। स्लॉट बुकिंग न होने और पोर्टल पर तकनीकी अड़चनों के कारण दर्जनों कोटवार परिवार आर्थिक संकट में फँस गए हैं।

सरकारी तंत्र की बेरुखी: 181 भी मौन कोटवार श्याम दाहिया ने बताया कि उन्होंने इस संवेदनशील मामले की शिकायत सीएम हेल्पलाइन (181) पर भी दर्ज कराई है। उम्मीद थी कि मुख्यमंत्री कार्यालय के हस्तक्षेप से उनकी समस्या का समाधान होगा, लेकिन कई दिन बीत जाने के बाद भी धरातल पर कोई कार्यवाही नहीं हुई है।कोटवारों की मुख्य मांगें:दोहरा मापदंड बंद हो: जब धान की खरीदी हुई थी, तो उसी रिकॉर्ड के आधार पर गेहूं की खरीदी तत्काल शुरू की जाए।विशेष स्लॉट की व्यवस्था: तकनीकी त्रुटि सुधारकर कोटवारों के लिए पोर्टल खोला जाए।

प्रशासनिक जांच: तहसीलदार या जिला आपूर्ति अधिकारी स्वयं संज्ञान लेकर इन गांवों के कोटवारों की उपज तुलवाने के निर्देश दें।

कोटवारों का कहना है कि यदि जल्द ही उनकी फसल नहीं खरीदी गई, तो वे कलेक्ट्रेट के सामने प्रदर्शन करने को मजबूर होंगे।

 

अधिकारियों का पक्ष: “पहले हो रही थी खरीदी, अब क्यों रुकी पता नहीं”इस पूरे मामले में कन्हवारा खरीदी केंद्र के प्रभारी कृष्ण दत्त पांडे का कहना है कि, “पूर्व में कोटवारों की गेहूं खरीदी की प्रक्रिया सुचारू रूप से शुरू थी और उनके स्लॉट भी बुक हो रहे थे। लेकिन अचानक अब पोर्टल पर स्लॉट बुकिंग क्यों बंद हो गई है और उनकी उपज क्यों नहीं ली जा रही, इसकी तकनीकी जानकारी हमारे पास नहीं है। इस संबंध में उच्च अधिकारियों से ही स्पष्टीकरण मिल पाएगा।”

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