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जिला अस्पताल कटनी: गेट पर विवाद, शिकायतकर्ता भाजपा नेता बोले – सुरक्षा कर्मी ने मोबाइल तोड़ा; CCTV जांच की मांग

जिला अस्पताल में मरीज के परिजन से मारपीट-मोबाइल तोड़ने का आरोप, भाजपा पदाधिकारी ने सिविल सर्जन को दी शिकायत

कटनी: जिला अस्पताल में परिजन से मारपीट-नेता ने मोबाइल तोड़ने का लगाया आरोप, सिविल सर्जन को शिकायत

 

*कटनी। निडर आवाज न्यूज*

जिला चिकित्सालय कटनी के प्रवेश द्वार पर 18 जून 2026 को विवाद और मारपीट की शिकायत सामने आई है। भाजपा कटनी ग्रामीण मंडल के मीडिया प्रभारी खेमचंद कुशवाहा ने सिविल सर्जन को लिखित शिकायत देकर सुरक्षा कर्मी और अन्य लोगों पर आरोप लगाए हैं। शिकायत 18/6/26 की तारीख की है।

*शिकायत में क्या लिखा है*  

खेमचंद कुशवाहा ने शिकायत में बताया कि वे अपनी साली को देखने महिला वार्ड आए थे। साथ में पुत्र सत्यम कुशवाहा और साला राकेश कुशवाहा भी थे। आरोप है कि गेट पर मौजूद नर्स/सुरक्षा कर्मी और 2 अन्य व्यक्तियों ने “मरीज के पास कोई नहीं” कहकर अभद्रता की। खेमचंद का आरोप है कि जब उन्होंने वीडियो बनाना चाहा तो उनके पुत्र सत्यम से मोबाइल छीनकर डिस्प्ले तोड़ दिया गया। शिकायत में धक्का-मुक्की, मारपीट और गाली-गलौज का भी जिक्र है। सुरक्षा कर्मी का नाम रोशनी चौधरी बताया गया है।

*क्या मांग की गई*

शिकायतकर्ता ने सिविल सर्जन से घटना की जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है। शिकायत में मोबाइल तोड़ने और मारपीट का उल्लेख है। कई प्रत्यक्षदर्शी होने का भी दावा किया गया है।

*अस्पताल/आरोपी पक्ष*

इस संबंध में सिविल सर्जन डॉ. यशवंत वर्मा और शिकायत में नामजद सुरक्षा कर्मी रोशनी चौधरी से पक्ष जानने का प्रयास किया जाएगा। अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि CCTV फुटेज और गवाहों के बयान के आधार पर ही स्थिति स्पष्ट होगी। खबर प्रकाशन तक अस्पताल प्रबंधन का आधिकारिक जवाब नहीं मिल सका।

*पुलिस का रुख*  

घटना को लेकर थाना कोतवाली में शिकायत दर्ज हुई है या नहीं, इसकी जानकारी ली जा रही है। मेडिकल रिपोर्ट और CCTV फुटेज जांच के बाद ही FIR को लेकर निर्णय होगा।

*निडर आवाज की टिप्पणी*

अस्पताल में मरीज के परिजन और सुरक्षा कर्मी के बीच विवाद दुर्भाग्यपूर्ण है। अगर आरोप सही हैं तो व्यवस्था पर सवाल है। अगर गलतफहमी है तो बातचीत से हल निकले। सिविल सर्जन और पुलिस से अपेक्षा है कि CCTV देखकर 24 घंटे में स्थिति स्पष्ट करें। अस्पताल में मरीज की सेवा बाधित न हो, ये प्राथमिकता होनी चाहिए।

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