बदले DEO, जगी उम्मीद: कटनी के छात्रों को भरोसा – अब चड्ढा कॉलेज की ऑनर्स वाली फीस का हिसाब होगा?
नए DEO सच्चिदानंद पांडे से छात्रों को उम्मीद: चड्ढा कॉलेज में बीकॉम ऑनर्स-फीस विवाद पर होगी जांच?

नए DEO सच्चिदानंद पांडे से छात्रों को उम्मीद: चड्ढा कॉलेज के फीस-डिग्री विवाद पर होगी कार्रवाई?
*कटनी। निडर आवाज न्यूज*
कटनी के चर्चित ऑटोनॉमस कॉलेज में बीकॉम ऑनर्स की फीस लेकर प्लेन डिग्री देने के मामले में नया मोड़ आ गया है। जिले में जिला शिक्षा अधिकारी के पद पर सच्चिदानंद पांडे के पदभार ग्रहण करते ही पीड़ित छात्रों की उम्मीदें फिर जागृत हुई हैं। छात्रों का मानना है कि नए DEO इस गंभीर मामले का संज्ञान लेकर उच्च शिक्षा विभाग को अवगत कराएंगे।
*पुराना मामला, नई उम्मीद*
गौरतलब है कि पूर्व में छात्रों और NSUI ने आरोप लगाया था कि कॉलेज प्रबंधन द्वारा प्रवेश के समय बीकॉम ऑनर्स के नाम पर ₹25,000 से ₹1,00,000 तक सालाना फीस वसूली गई। लेकिन 3 साल बाद NEP के चौथे वर्ष की गाइडलाइन न होने का हवाला देकर छात्रों को प्लेन/जनरल बीकॉम की डिग्री दी जा रही है। तब तत्कालीन DEO राजेश अग्रहरि ने कहा था कि कॉलेज का दायरा उनके विभाग में नहीं है।
*छात्र बोले – अब न्याय की उम्मीद*
पीड़ित छात्रों का कहना है कि “पहले हमारी शिकायत सुनी ही नहीं गई। अब नए DEO सच्चिदानंद पांडे सर आए हैं, हमें भरोसा है कि वे हमारी बात उच्च शिक्षा विभाग और कलेक्टर तक पहुंचाएंगे। हम ऑनर्स की फीस दिए हैं तो ऑनर्स की डिग्री चाहिए, या फीस का अंतर वापस चाहिए”।
*कानूनी पहलू*
राज्य शैक्षिक संस्थान अधिनियम के तहत निर्धारित सीमा से अधिक शुल्क वसूलना दंडनीय अपराध है। शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि अगर फीस ऑनर्स की ली गई और डिग्री प्लेन की दी गई, तो ये विश्वविद्यालय और उच्च शिक्षा विभाग के दायरे का मामला बनता है।
*प्रबंधन का पुराना पक्ष*
पूर्व में कॉलेज प्रबंधक श्री जय चड्ढा से संपर्क करने पर उन्होंने कहा था “कार ड्राइविंग कर रहा हूं, कॉलेज आकर जानकारी लें”। नए सिरे से संपर्क करने का प्रयास किया जाएगा।
*नए DEO की भूमिका क्या होगी?*
जिला शुल्क नियामक समिति की अध्यक्षता कलेक्टर करते हैं, जबकि DEO सचिव होते हैं। हालांकि DEO का दायरा 12वीं तक के स्कूल हैं, पर ऐसे प्रकरण में वे अपनी रिपोर्ट कलेक्टर/उच्च शिक्षा विभाग को भेजकर जांच की अनुशंसा कर सकते हैं।
*निडर आवाज की टिप्पणी*
DEO का बदलना केवल कुर्सी बदलना नहीं, सिस्टम में नई उम्मीद जगाना है। सच्चिदानंद पांडे के सामने ये पहली बड़ी परीक्षा है। कटनी के छात्र उनसे न्याय की आस लगाए बैठे हैं। अब देखना ये है कि फाइल आगे बढ़ती है या पुरानी तरह “दायरा नहीं है” कहकर बंद हो जाती है। छात्रों का भविष्य दांव पर है।
*नोट:* यह खबर पूर्व में प्रकाशित आरोपों और वर्तमान में छात्रों की प्रतिक्रिया पर आधारित है। नए DEO और कॉलेज प्रबंधन का पक्ष मिलने पर अपडेट किया जाएगा।




