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विजयराघवगढ़ में वायु प्रदूषण का कहर: आदिवासी क्षेत्रों में सांस लेने के लिए संघर्ष

आदिवासी क्षेत्रों में प्रदूषण का कहर: सरकार और प्रशासन की अनदेखी

कटनी के विजयराघवगढ़ में वायु प्रदूषण का कहर: आदिवासी क्षेत्रों में जीवन नर्क

 

कटनी जिले के विजयराघवगढ़ विधानसभा क्षेत्र में आदिवासी बहुल्य क्षेत्रों में वायु प्रदूषण ने लोगों का जीवन दूभर कर दिया है। पड़खुड़ी से लेकर कैमोर तक मेन रोड किनारे धड़ल्ले से चल रहे क्रेशर प्लांट, मुर्गी दाना प्लांट, चूना भट्टा, खदानें और अन्य उद्योगों ने यहां के लोगों के लिए जीना मुश्किल कर दिया है।

धुआं और धूल का अंबार लगा रहता है, जिससे यहां से गुजरने वाले यात्रियों को भी श्वास लेने में परेशानी होती है। स्थानीय लोगों की माने तो यहां के निवासियों की अल्पायु हो रही है और बच्चों में गंभीर बीमारियां बढ़ रही हैं।

 

*प्रदूषण के कारण:*

क्रेशर प्लांट, मुर्गी प्लांट, चूना भट्टा, खदानें और अन्य उद्योग

– खदानों में भारी ब्लास्टिंग

– वाहनों के धुएं और धूल

*प्रदूषण का प्रभाव:*

– सांस लेने में परेशानी

– अल्पायु

– गंभीर बीमारियां

– जीव जंतुओं का पलायन

*आदिवासी क्षेत्रों में जीवन:*

 

– यहां के आदिवासी परिवारों का जीवन प्रदूषण के कारण बहुत प्रभावित हो रहा है।

– बच्चों को सांस लेने में परेशानी होती है और वे गंभीर बीमारियों से ग्रसित हो रहे हैं।

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