लाखों का घोटाला? कन्हवारा की नवनिर्मित टंकी पंचायत को सौंपने से पहले ही बीमार, ठेकेदार कर रहा लीपापोती*
जल' की जगह 'जाल'! कन्हवारा पानी टंकी में घटिया निर्माण, सीलन छुपाने को केमिकल का इस्तेमाल
हैंडओवर से पहले ही टंकी में सीलन: ठेकेदार पेंट-केमिकल से ढक रहा ‘दाग’ | सचिव नरेश पटेल ने कहा- गुणवत्ता की गारंटी के बिना नहीं लेंगे चार्ज, ग्रामीणों ने उठाए भ्रष्टाचार के सवाल
*कन्हवारा, कटनी, 2 जून 2026:* ग्राम कन्हवारा में जल जीवन मिशन के तहत बनी पानी की टंकी को लेकर विवाद गहरा गया है। हैंडओवर से पहले ही टंकी की दीवारों में सीलन आने और ठेकेदार द्वारा पेंट-केमिकल से लीपापोती के आरोपों के बीच *पंचायत सचिव नरेश पटेल ने साफ कर दिया है कि जब तक टंकी 2 महीने तक बिना रुकावट सही नहीं चलेगी, पंचायत इसे अपने सुपुर्द नहीं लेगी।*
*सचिव ने लगाई शर्त*
पंचायत सचिव नरेश पटेल ने कहा, _”अभी हम पानी की टंकी अपने सुपुर्द नहीं लेंगे। ठेकेदार को पहले 2 महीने तक टंकी को लगातार चलाकर दिखाना होगा। अगर इस दौरान लीकेज, सीलन या कोई तकनीकी खराबी आई तो हैंडओवर नहीं होगा। जनता के पैसे से बनी योजना में गुणवत्ता से समझौता नहीं करेंगे।”_
*क्या है पूरा मामला?*

कन्हवारा में निर्माणाधीन पानी की टंकी अंतिम चरण में है। ग्रामीणों का आरोप है कि पंचायत को सौंपे बिना ही टंकी की दीवारों में सीलन के निशान आ गए हैं। आरोप है कि घटिया निर्माण छुपाने के लिए ठेकेदार मजदूरों से पेंटिंग और केमिकल ट्रीटमेंट करा रहा है। मौके की तस्वीरों में मजदूर टंकी पर चढ़कर पेंट करते दिख रहे हैं।
*ग्रामीणों में आक्रोश, विभाग मौन*
स्थानीय लोगों का कहना है, “लाखों की टंकी बनने से पहले ही बीमार हो गई। पेंट से कब तक छुपेगा भ्रष्टाचार?” वहीं पीएचई विभाग और जनपद पंचायत के अधिकारियों से संपर्क नहीं हो सका। ठेकेदार का भी पक्ष नहीं मिल पाया है।
*ग्रामीणों की मांग:*
1. हैंडओवर से पहले टंकी का वाटर लोड टेस्ट और थर्ड पार्टी क्वालिटी चेक हो।
2. निर्माण में भ्रष्टाचार की जांच कर दोषी ठेकेदार-अधिकारी पर कार्रवाई हो।
3. टेंडर राशि, सामग्री और भुगतान की जानकारी सार्वजनिक की जाए।
*बड़ा सवाल:*
तो क्या विभाग ने निर्माण के दौरान मॉनिटरिंग नहीं की? क्या पेंट-केमिकल से सीलन रोकने का ‘जुगाड़’ सफल होगा या पहली बारिश में खुल जाएगी पोल?
*एडिटर नोट:* खबर ग्रामीणों के आरोपों, मौके की स्थिति और पंचायत सचिव के बयान पर आधारित है। निर्माण की गुणवत्ता और भ्रष्टाचार के आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। ठेकेदार और पीएचई विभाग का पक्ष प्रतीक्षित है।




