“फसल बर्बाद, मवेशी मरे, अब और नहीं सहेंगे: *”मरम्मत नहीं हुई तो सड़क पर उतरेंगे: पोंडी पडरिया,खमतरा में बिजली को लेकर तनाव”
1 साल से बिजली के नाम पर अंधेरा, DE बोले मरम्मत होगी, JE गायब"

“ग्रामवासियों का आरोप – JE-DE कर रहे भेदभाव। चेतावनी: समस्या हल नहीं हुई तो देंगे धरना, नहीं भरेंगे बिजली बिल”
निडर आवाज, कटनी। कटनी तहसील के *ग्राम पोंडी पडरिया, खमतरा के किसान और ग्रामीण पिछले *1 साल से बिजली की बदहाली* झेलने को मजबूर हैं। दिन भर बिजली कटौती, रात को सांप-सा वोल्टेज और ऊपर से मनमाने बिल ने ग्रामीणों का जीना मुहाल कर दिया है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए गांव के *राजमणि सिंह, निखिल तिवारी, कमलेश तिवारी, राहुल तिवारी, पवन पटेल* सहित दर्जनों ग्रामीणों ने *मध्यप्रदेश पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के मुख्य अभियंता, कटनी को लिखित शिकायत सौंपकर JE मनोज तिवारी और DE महोबे पर गंभीर आरोप लगाए हैं।

आवेदन में क्या कहा ग्रामीणों ने:
1. 1 साल से बिजली गुल: आवेदन में लिखा है _”पिछले लगभग 1 वर्षों से गांव में बिजली आपूर्ति की समस्या है। पूरे दिन बिजली कटौती और जब आती है तो वोल्टेज कम रहता है”_। इससे किसानों की फसलें बर्बाद हो रही हैं।
2. *भेदभाव और मनमाना बिल:* ग्रामीणों का आरोप है कि _”विभाग के अधिकारियों द्वारा जानबूझकर कम वोल्टेज दिया जा रहा है, उपयोग से अधिक बिजली के बिल भेजे जा रहे हैं”_। JE और DE पर *ग्राम से द्वेषतापूर्ण व्यवहार* का आरोप लगाया गया है।
3. कटे तार, मौत का खतरा: सबसे खतरनाक बात – _”बिजली सप्लाई के तार खराब और कटे हुए हैं”_। शिकायत में कहा गया है _”तार कटे होने से पहले ही 2 मवेशियों की जान जा चुकी है”_। ग्रामीणों ने चेताया कि यदि किसी इंसान को कुछ हुआ तो *जिम्मेदारी विद्युत विभाग की होगी*।

4. *आंदोलन की चेतावनी: आक्रोशित ग्रामीणों ने साफ कहा है – _”यदि समस्या का समाधान नहीं हुआ तो कटनी में धरना-विरोध प्रदर्शन करेंगे और भविष्य में किसी भी प्रकार का बिजली बिल भुगतान नहीं करेंगे”_।

*DE ने मानी लापरवाही, JE ने साधी चुप्पी*
ग्रामीणों के आवेदन के बाद *DE महोबे* का बयान आया है। उन्होंने कहा कि *”गांव में केबिल-तार की मरम्मत करने के लिए JE को निर्देशित कर दिया गया है”।
भेदभाव के आरोपों पर DE ने पल्ला झाड़ते हुए कहा *”ऐसा कुछ भी नहीं है। लोगों को केवल बिजली बिल जमा करने के लिए कहा जा रहा है”।

वहीं दूसरी ओर *JE मनोज तिवारी से उनका पक्ष जानने के लिए बार-बार संपर्क किया गया, लेकिन उन्होंने फोन नहीं उठाया*।
सवाल विभाग से:
जब समस्या 1 साल पुरानी है और 2 मवेशी मर चुके हैं, तो अब तक तार क्यों नहीं बदले गए? JE फोन क्यों नहीं उठा रहे? क्या ग्रामीणों को बिल भरने के लिए मजबूर करके जान जोखिम में डालना ही विभाग की नीति है?
ग्रामीण अब DE के आदेश पर मरम्मत का इंतजार कर रहे हैं। *निडर आवाज* इस मामले पर आगे भी नजर रखेगा।




