कटनी में UGC के खिलाफ सवर्णों का महाविस्फोट, भाजपा नेता ने ही खोला मोर्चा कन्हैया तिवारी की बगावत से भाजपा में हड़कंप
कटनी: यूजीसी कानून के विरोध में भाजपा नेता बोले- आने वाली पीढ़ी के लिए लड़ूंगा

भाजपा में फूट! यूजीसी कानून और आरक्षण के खिलाफ अब भाजपा के ही वरिष्ठ नेता ने खोला मोर्चा, बोले- पार्टी से बड़ा समाज
*कटनी।* यूजीसी कानून और आरक्षण व्यवस्था के खिलाफ कलेक्ट्रेट के बाहर चल रहा सवर्ण समाज का महाआंदोलन अब भाजपा के लिए गले की फांस बनता जा रहा है। आंदोलन के चौथे दिन वो हुआ जिसने भाजपा खेमे में हड़कंप मचा दिया है।
भाजपा के वरिष्ठ नेता, किसान मोर्चा के पूर्व जिलाध्यक्ष और पूर्व जनपद अध्यक्ष *कन्हैया तिवारी* खुलकर आंदोलन के मंच पर पहुंचे और आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया। तिवारी का मंच पर पहुंचना इस बात का सीधा संकेत है कि अब भाजपा के अंदर ही यूजीसी के नए प्रावधानों के खिलाफ खुलकर बगावती स्वर गूंजने लगे हैं।
मंच से गरजे कन्हैया तिवारी – पार्टी से बड़ा है समाज

मंचासीन होते हुए कन्हैया तिवारी ने कहा कि “मैं अपने समाज को पार्टी की स्वार्थपरिता से ऊपर मानता हूं। समाज और आने वाली पीढ़ी के हित के लिए मैं यहां आया हूं।” तिवारी के इस बयान के बाद अनशन स्थल पर मौजूद सैकड़ों लोगों ने तालियों से उनका स्वागत किया।
कन्हैया तिवारी का ये बयान सीधे-सीधे भाजपा के शीर्ष नेतृत्व के लिए एक बड़ी चुनौती माना जा रहा है। जब पार्टी का ही वरिष्ठ नेता मंच से कहे कि पार्टी स्वार्थी हो गई है और समाज बड़ा है, तो इसके राजनीतिक मायने बहुत गहरे हैं।
ब्राह्मण महासभा ने दिया पूर्ण समर्थन, चौथे दिन भी अनशन जारी
इससे पहले अखिल भारतीय ब्राह्मण एकीकृत परिषद और राष्ट्रीय करणी सेना द्वारा शुरू किए गए इस अनिश्चितकालीन अनशन को गुरुवार को अखिल भारतीय ब्राह्मण महासभा ने भी अपना पूर्ण समर्थन दे दिया। महासभा के जिलाध्यक्ष राजू शर्मा अपनी पूरी टीम के साथ कलेक्ट्रेट पहुंचे।
अनशनकारियों का स्वास्थ्य परीक्षण शासकीय मेडिकल टीम कर रही है। अनशनकारी फलाहार पर हैं लेकिन हौसले बुलंद हैं। सबसे खास बात ये है कि इस आंदोलन में बड़ी संख्या में *मातृ शक्ति* भी पहुंच रही है, जिसने आंदोलन को और धार दे दी है।
अब आर-पार की लड़ाई
आंदोलनकारियों ने साफ कहा है कि जब तक यूजीसी कानून के मूल ढांचे में सुधार और आरक्षण व्यवस्था पर पुनर्विचार नहीं होता, आंदोलन जारी रहेगा। शाम को हवन कार्यक्रम भी रखा गया है।
सवाल ये है कि जब भाजपा के ही कद्दावर नेता कन्हैया तिवारी जैसे लोग बागी हो रहे हैं, तो क्या भाजपा इस मुद्दे पर अपने ही नेताओं को मना पाएगी? कटनी से उठी ये चिंगारी अब पूरे प्रदेश में सवर्ण आंदोलन की आग बन सकती है।




