एसआईआर प्रक्रिया से सरकारी कर्मचारियों का बढ़ा बोझ: निजी स्कूलों के कर्मचारियों का साथ लेने की मांग,स्कूलों और आंगनवाड़ी पर पड़ा प्रभाव
SIR का दर्द ,मध्य प्रदेश में एसआईआर प्रक्रिया की समीक्षा की मांग

मध्य प्रदेश में एसआईआर प्रक्रिया ने बढ़ाई कर्मचारियों और जनता की परेशानी
मध्य प्रदेश में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की प्रक्रिया शुरू होने से सरकारी कर्मचारियों और आम जनता को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इस प्रक्रिया में स्कूलों के शिक्षकों, आंगनवाड़ी और अन्य सरकारी कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई है, जिससे उनके काम का बोझ बढ़ गया है और वे परेशान हो रहे हैं।
*बीएलओ की परेशानी*
एक बीएलओ ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि वे दिनभर और रात 3 बजे तक लोगों के फोन कॉल का जवाब देते हैं और फॉर्म भरवाने में मदद करते हैं। कई लोगों की बड़ी परेशानियाँ भी सामने आ रही हैं, जिनमें वे दर-दर भटक रहे हैं।
*स्कूलों और आंगनवाड़ी पर प्रभाव*
एसआईआर प्रक्रिया में सरकारी कर्मचारियों की ड्यूटी लगाने से स्कूलों में शिक्षकों की कमी हो गई है, जिससे बच्चों की पढ़ाई बाधित हो रही है। आंगनवाड़ी में भी यही हाल है, जिससे बच्चों और महिलाओं को परेशानी हो रही है।
*सरकार से मांग*
सरकार को चाहिए कि वे निजी स्कूलों के कर्मचारियों का साथ ले और एसआईआर प्रक्रिया में उनकी सेवा से लोगों की बन रही समस्या को निजात दिलाए। इससे सरकारी कर्मचारियों का बोझ कम होगा और आम जनता को भी राहत मिलेगी।




