क्राइममध्य प्रदेश

विजयराघवगढ़ में ‘काली पट्टी’ बांधे बैठा खनिज अमला, करोड़ों के राजस्व पर डांका- दिन-दहाड़े चल रही जेसीबी-पोकलेन

मीडिया में सुर्खियां, फिर भी नहीं टूटी नींद: खनिज माफियाओं के आगे नतमस्तक विभाग?

लगातार खबरों के बाद भी नहीं जागा खनिज विभाग, विजयराघवगढ़ में खुलेआम हो रहा अवैध लाइमस्टोन खनन

 

*कटनी।* विजयराघवगढ़ विधानसभा क्षेत्र के पढ़रेही–जमुआनि गांव में अवैध खनन का खेल महीनों से जारी है, लेकिन खनिज विभाग की चुप्पी नहीं टूट रही। लगातार मीडिया में खबरें प्रकाशित होने के बावजूद अवैध उत्खननकर्ताओं पर कोई बड़ी कार्रवाई नहीं हुई, जिससे खनन माफियाओं के हौसले बुलंद हैं।

*दिन-दहाड़े चल रहा ‘काला कारोबार’*

ग्राम पढ़रेही और जमुआनि में बिना किसी वैध लीज के भारी मशीनों और दर्जनों डंपरों से लाइमस्टोन पत्थर का उत्खनन किया जा रहा है। मौके से मिले वीडियो और तस्वीरों में साफ दिख रहा है कि दिन के उजाले में जेसीबी-पोकलेन मशीनें जमीन को खोखला कर रही हैं और डंपरों की लाइनें पत्थर ढो रही हैं। ग्रामीणों के मुताबिक यह अवैध काम पिछले कई महीनों से निर्बाध चल रहा है।

 

*करोड़ों के राजस्व पर डाका* 

सूत्रों का दावा है कि इस संगठित अवैध खनन से शासन को हर महीने करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा है। नई जगहों पर बिना लीज के खनन कर माफिया सीधे सरकारी खजाने को चूना लगा रहे हैं। खनन के कारण जमीन खोखली हो रही है, जिससे पर्यावरण के साथ-साथ भविष्य में बड़े हादसों का खतरा भी बढ़ गया है।

 

*विभाग की ‘काली पट्टी’, सिर्फ खानापूर्ति*  

स्थानीय लोगों का आरोप है कि कई बार शिकायतों के बाद भी खनिज विभाग सिर्फ औपचारिकता निभाता है। टीम कभी-कभार मौके पर पहुंचती जरूर है, लेकिन कार्रवाई के नाम पर खानापूर्ति कर लौट जाती है। विभाग की इसी निष्क्रियता पर अब बड़े सवाल खड़े हो रहे हैं — क्या यह लापरवाही है या मिलीभगत?

 

*ग्रामीणों में आक्रोश* 

ग्रामीणों का कहना है कि खबरें छपने के बाद भी हालात जस के तस हैं। “अधिकारी सब जानते हैं, लेकिन कार्रवाई कोई नहीं करता। लगता है सबकी मिलीभगत है,” एक ग्रामीण ने नाम न छापने की शर्त पर बताया।

 

*उठ रहे बड़े सवाल*  

1. महीनों से चल रहे अवैध खनन की जानकारी के बावजूद खनिज विभाग चुप क्यों है?

2. लगातार खबरों के प्रकाशन के बाद भी जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई क्यों नहीं?

3. करोड़ों के राजस्व नुकसान की भरपाई कौन करेगा?

 

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अब भी सख्त कदम नहीं उठाए गए तो यह अवैध कारोबार न केवल पर्यावरण को बर्बाद करेगा, बल्कि सरकारी खजाने को अरबों का नुकसान पहुंचाता रहेगा।

 

फिलहाल जनता प्रशासन से सिर्फ एक सवाल पूछ रही है — आखिर कब टूटेगी खनिज विभाग की नींद?

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