शिकायतों के बाद भी नहीं टूटी नींद: कटनी में खुलेआम बिक रही महंगी शराब, QR कोड नदारद
कटनी में रेट लिस्ट गायब, MRP से ज्यादा वसूली: आबकारी विभाग ने मूंदी आंखें

कन्हवारा से बरही तक शराब सिंडिकेट का कब्जा, रेट लिस्ट गायब, जनता बेहाल!
कटनी। जिले में आबकारी विभाग की निष्क्रियता अब चर्चा का विषय नहीं, बल्कि जनाक्रोश का कारण बन चुकी है। लगातार खबरों के प्रकाशन और जन शिकायतों के बावजूद विभाग ने चुप्पी साध रखी है, जिससे साफ जाहिर होता है कि शराब माफियाओं के हौसले बुलंद हैं। कन्हवारा से लेकर विजयराघवगढ़ और खिरहनी से बरही तक, पूरे जिले में नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं।

न रेट लिस्ट, न QR कोड—सिर्फ मनमानी वसूली
शासन का स्पष्ट नियम है कि हर शराब दुकान पर अनिवार्य रूप से रेट लिस्ट और QR कोड चस्पा होना चाहिए ताकि ग्राहक ठगी का शिकार न हो। लेकिन कटनी जिले की हकीकत इसके उलट है। सेल्समैन बिना किसी डर के एमआरपी (MRP) से कहीं ज्यादा दामों पर शराब बेच रहे हैं। दुकानों पर रेट लिस्ट न होना सीधे तौर पर अवैध वसूली को बढ़ावा देना है, जिस पर आबकारी विभाग ने आंखें मूंद ली हैं।
गांव-गांव में पैकारी का जाल
कन्हवारा से विजयराघवगढ़ और बरही क्षेत्र के हालात सबसे ज्यादा खराब हैं। यहाँ केवल अधिक दाम ही नहीं, बल्कि अवैध पैकारी (अवैध बिक्री केंद्रों) का जाल भी बिछा हुआ है। ग्रामीण क्षेत्रों में खुलेआम अवैध शराब बिक रही है, जिससे सामाजिक माहौल बिगड़ रहा है। हाल ही में कई ग्रामीणों ने माफियाओं की धमकियों और अवैध बिक्री के खिलाफ मोर्चा भी खोला है, लेकिन विभाग की ‘विशेष कार्रवाई’ सिर्फ कागजों तक ही सीमित नजर आती है।

आखिर किसका संरक्षण?
सवाल यह उठता है कि क्या विभाग की यह निष्क्रियता महज लापरवाही है या किसी बड़े गठजोड़ का हिस्सा? जब नियम स्पष्ट हैं और शिकायतें आम हैं, तो अब तक ठोस कार्रवाई क्यों नहीं हुई? जनता अब सीधे कलेक्टर और शासन से गुहार लगा रही है कि इन बेलगाम शराब दुकानों पर नकेल कसी जाए और भ्रष्टाचार पर लगाम लगे।




