BREAKING: कटनी में 10000 बोरी घोटाला, SDM की FIR की अनुशंसा दबाई, कलेक्टर की चुप्पी पर CM हेल्पलाइन में शिकायत
कलेक्टर कटनी सवालों के घेरे में: SDM की 'दंडात्मक कार्यवाही' की रिपोर्ट 24 दिन से ठंडे बस्ते में, अब भोपाल तक पहुंची आग
कटनी में 10000 बोरी घोटाला: SDM की FIR की अनुशंसा दबाने का आरोप, CM हेल्पलाइन 181 में पहुंचा मामला
*कटनी।* विजयराघवगढ़ तहसील के कांटी खरीदी केंद्र में हुए 10000 प्लास्टिक बारदाना घोटाले में बड़ा खुलासा हुआ है। तहसीलदार द्वारा अवैध रूप से निजी दुकान में रखा गया सरकारी बारदाना जब्त करने और SDM द्वारा _“दंडात्मक कार्यवाही”_ की स्पष्ट अनुशंसा के बावजूद कलेक्टर कटनी ने 24 दिन से फाइल दबा रखी है। अब इस मामले की शिकायत CM हेल्पलाइन 181 में दर्ज होने से जिला प्रशासन में हड़कंप मच गया है।
*क्या है पूरा मामला?*

शिकायतकर्ता कमल शर्मा ने CM हेल्पलाइन क्र. 38385807 में दर्ज कराया कि कांटी खरीदी केंद्र प्रभारी अनमोल दुबे ने खरीदी के लिए आए 10000 प्लास्टिक बारदाना को केंद्र में न रखकर ग्राम कटरिया के व्यापारी शेख सलीम की दुकान में अवैध रूप से रखवा दिया। मामले का खुलासा होने पर तहसीलदार ने छापा मारकर बारदाना जब्त कर लिया।
*SDM ने खोली पोल, कलेक्टर ने मूंदी आंखें*
जांच के बाद अनुविभागीय अधिकारी विजयराघवगढ़ ने 24.04.2026 को पत्र क्र. 550 में साफ लिखा कि _“प्रथमदृष्टया प्रतीत होता है कि श्री अनमोल दुबे द्वारा 10000 बारदाना जानबूझकर निजी व्यापारी के दुकान पर रखवाए गए… बारदानों का दुरुपयोग परिलक्षित हुआ”_। SDM ने अनमोल दुबे को पद से हटाने और दोनों आरोपियों के विरुद्ध _दंडात्मक कार्यवाही_ की अनुशंसा कर रिपोर्ट कलेक्टर की खाद्य शाखा को भेज दी।
*21 दिन से कार्रवाई शून्य, जनता में आक्रोश*
हैरानी की बात है कि SDM की रिपोर्ट मिलने के 21 दिन बाद और सामाजिक संगठनों द्वारा 12 मई को कलेक्ट्रेट के सामने पुतला दहन-ज्ञापन के बावजूद आज 18 मई 2026 तक आरोपी अनमोल दुबे कांटी खरीदी केंद्र का प्रभारी बना हुआ है। न FIR हुई, न निलंबन।
*अब CM हेल्पलाइन में आर-पार*
कलेक्टर की इस संदिग्ध चुप्पी से नाराज शिकायतकर्ता कमल शर्मा ने 18 मई को CM हेल्पलाइन 181 में शिकायत दर्ज करा दी। शिकायत में साफ मांग की गई है कि तत्काल FIR दर्ज कर अनमोल दुबे को पद से पृथक किया जाए।
*क्यों गंभीर है मामला?*
सरकारी बारदाना को निजी दुकान में रखना आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 की धारा 3/7 का सीधा उल्लंघन है। SDM द्वारा _“जानबूझकर”_ शब्द का प्रयोग इसे आपराधिक कृत्य की श्रेणी में लाता है। सवाल उठ रहे हैं कि जब SDM ने FIR की अनुशंसा कर दी तो कलेक्टर स्तर पर कार्रवाई किसके दबाव में रोकी गई?
*अब क्या?*
CM हेल्पलाइन में शिकायत L1 स्तर पर दर्ज हो चुकी है। नियमानुसार कलेक्टर को 7 दिन में जवाब देना होगा। जवाब न देने पर मामला स्वतः कमिश्नर जबलपुर के पास L2 लेवल पर पहुंच जाएगा। सामाजिक संगठनों ने चेतावनी दी है कि अगर 7 दिन में FIR नहीं हुई तो हाई कोर्ट जबलपुर में जनहित याचिका दायर की जाएगी।
_“जब SDM खुद अपराध प्रमाणित कर रहें है और FIR की अनुशंसा कर रहा है, तो कलेक्टर कार्रवाई से क्यों बच रहे हैं? क्या जिला प्रशासन भ्रष्टाचारियों को संरक्षण दे रहा है?”_ – यह सवाल अब पूरे कटनी में गूंज रहा है।
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