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कन्हवारा जमीन कांड: आरोपी मौज में, वादी बोला- कोर्ट खुलते ही फूटेगा फर्जी वसीयत का भांडा

"अभी बच लो भाई": फर्जी वसीयत केस में कमलेश की ललकार | कोर्ट खुलते ही तहसीलदार का आदेश भी निशाने पर

⚖️ _कटनी कोर्ट: छुट्टी के बाद धमाका तय_ ⚖️ कन्हवारा जमीन कांड: फर्जी वसीयत के आरोपी समर वेकेशन की आड़ में | वादी कमलेश की चेतावनी- छुट्टी खत्म, कोर्ट में होगा आमना-सामना*

 

*कटनी, 23 मई 2026:* ग्राम कन्हवारा में मौसी की 0.04 हेक्टेयर जमीन फर्जी वसीयत से हड़पने के मामले ने तूल पकड़ लिया है। वादी कमलेश कुशवाहा ने लीगल नोटिस देकर कोर्ट जाने का ऐलान कर दिया है। आरोप है कि प्रतिवादी कैलाशचन्द्र और कमल कुमार कोर्ट के समर वेकेशन का फायदा उठाकर राहत की सांस ले रहे हैं।

*वादी की दो टूक: “अभी बच लो, छुट्टी के बाद कोर्ट में मिलेंगे”*

कमलेश कुशवाहा ने कहा – “मौसी गंगीबाई की मौत 30 अगस्त 2021 को हुई। उसके बाद फर्जी वसीयत बनाकर तहसीलदार से 16 जून 2023 को नामांतरण करा लिया। 0.04 हेक्टेयर जमीन को 0.02 हेक्टेयर कर दिया। अब कोर्ट समर वेकेशन पर है तो दोनों भाई सोच रहे हैं बच गए। लेकिन नोटिस जा चुका है। छुट्टी खत्म होते ही पहला वाद कटनी कोर्ट में दाखिल होगा।”

*क्या है फर्जी वसीयत का खेल*

नोटिस के अनुसार, गंगीबाई काछी की खसरा नंबर 564 की जमीन पर वादी अपना हक बता रहा है। आरोप है कि कैलाशचन्द्र कुशवाहा और कमल कुमार कुशवाहा ने कथित फर्जी वसीयत के आधार पर तहसील से नाम अपने नाम चढ़वा लिया। वादी की मांग है कि वसीयत शून्य घोषित हो, तहसीलदार का आदेश रद्द हो और जमीन पर निषेधाज्ञा लगे।

*तहसीलदार-कलेक्टर भी घेरे में*

कानूनी बाध्यता के चलते तहसीलदार कटनी और कलेक्टर कटनी को भी पक्षकार बनाया गया है। वादी का आरोप है कि बिना जांच के फर्जी दस्तावेज पर नामांतरण कैसे हो गया। 1600 रुपए का दावा ठोककर कमलेश ने आर-पार की लड़ाई का संकेत दे दिया है।

*अब समर वेकेशन ही सहारा*

कोर्ट सूत्रों के मुताबिक, जिला कोर्ट में 15 जून तक समर वेकेशन चल रहा है। इस दौरान नई फाइलिंग रुकी हुई है। जानकारों का कहना है कि प्रतिवादियों को इसी का फायदा मिल रहा है। लेकिन वेकेशन खुलते ही पहला केस इसी जमीन का लगेगा।

वादी का दावा – “तब तक बच लो, उसके बाद दूध का दूध पानी का पानी हो जाएगा। फर्जी वसीयत का भांडा कोर्ट में फूटेगा।”

*डिस्क्लेमर:* यह खबर वादी द्वारा दिए गए लीगल नोटिस और बयानों पर आधारित है। सभी आरोप न्यायालय में विचाराधीन हैं। प्रतिवादियों का पक्ष आने पर प्रकाशित किया जाएगा। कोर्ट का समर वेकेशन एक सामान्य प्रक्रिया है।

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