खबर का असर: आधी रात शंकर तालाब पहुंची पुलिस, लेकिन खनिज-वन-राजस्व विभाग अब भी मौन
धार्मिक आस्था के केंद्र को खोदने वाले माफिया पर NSA की मांग, ग्रामीण बोले- 'उच्च स्तरीय जांच हो, वरना आंदोलन'

“कन्हवारा के शंकर तालाब मामले में ‘ निडर आवाज’ की खबर का बड़ा असर… आधी रात पुलिस पहुंची मौके पर… लेकिन खनिज, वन और राजस्व विभाग अब भी खामोश… सूत्रों का दावा- सहसपुरा में डंप होता हैं करोड़ों का अवैध आयरन ओर..
कटनी:* निडर आवाज में *”आस्था पर पोकलेन“* खबर प्रकाशित होने के बाद आखिरकार पुलिस हरकत में आई। विगत रात्रि पुलिस बल शिव मंदिर के सामने स्थित शंकर तालाब पहुंचा, जहां खनन माफिया ने पोकलेन से आयरन ओर का अवैध उत्खनन कर तालाब को गड्ढे में बदल दिया था।
*लेकिन बड़ा सवाल अब भी कायम है* – अवैध खनन के इस संगीन मामले पर *खनिज विभाग, वन विभाग और राजस्व प्रशासन सबने चुप्पी क्यों साध रखी है?* माफिया ने तो सारी हदें पार करते हुए धार्मिक आस्था के केंद्र प्राचीन शिव मंदिर के सामने बने शंकर तालाब को ही खोद डाला।

*सूत्र: सहसपुरा में डंप होता है करोड़ों का आयरन ओर*
सूत्रों की मानें तो माफिया ने तालाब से निकाले गए *अवैध आयरन ओर का भंडारण नजदीकी ग्राम सहसपुरा में किया जाता है।* योजना बनाकर इसे महंगे दामों में रात के अंधेरे में ट्रकों में लादकर जिले से बाहर भेजा गया है यानी सरकार को राजस्व का चूना और माफिया की जेबें गर्म।

*ग्रामीणों की दो टूक: ‘उच्च स्तरीय जांच कराओ‘*
घटना से आक्रोशित ग्रामीणों ने मांग की है कि इस गंभीर मामले की *तत्काल उच्च अधिकारियों से जांच करवाई जाए।* दोषी माफिया और इसमें शामिल सरकारी कर्मचारियों पर इतनी कड़ी कार्यवाही हो कि एक नजीर पेश हो। ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि अगर कार्रवाई नहीं हुई तो मंदिर परिसर में ही उग्र आंदोलन होगा।

*’उम्मीद कम है’: फोन न उठाने वाला प्रशासन क्या कार्रवाई करेगा?*
लेकिन ग्रामीणों को प्रशासन से ऐसी किसी सख्त कार्यवाही की *उम्मीद कम ही है।* उनका तर्क साफ है – *”जिस प्रशासन के अधिकारी खबर छपने के बाद भी फोन उठाने में असमर्थता जताते हैं, वो माफिया पर क्या खाक कार्रवाई करेंगे?”* तहसीलदार का फोन पहले भी नहीं उठा था। खनिज अधिकारी और वन विभाग के अफसर भी मामले पर मौन हैं।

*3 विभाग, 1 चुप्पी – मिलीभगत या लाचारी?*
सवाल उठता है कि आयरन ओर का अवैध खनन *खनिज विभाग* का मामला है, मंदिर-तालाब के पास खुदाई *राजस्व* का विषय है, और पर्यावरण को नुकसान *वन विभाग* देखता है। फिर भी तीनों विभाग खामोश क्यों? क्या यह मिलीभगत है या प्रशासनिक लाचारी?
*पुलिस पहुंची, पर आगे क्या?*
फिलहाल पुलिस ने मौका-मुआयना कर लिया है। लेकिन ग्रामीण पूछ रहे हैं कि क्या सिर्फ दिखावे की कार्रवाई होगी या पोकलेन जब्त कर माफिया पर NSA लगेगा?




