गाय को राष्ट्रीय पशु बनाने की मांग पर हिंदू-मुस्लिम एक साथ… जमीयत उलेमा की मांग को बजरंग दल का समर्थन.
बजरंग दल के समर्थन के बाद कटनी देश के लिए 'सांप्रदायिक सद्भाव का मॉडल' बन गया है
जहां मुस्लिम संगठन गाय को राष्ट्रीय पशु बनाने की मांग करे और हिंदू संगठन उसका स्वागत करे, वहां नफरत की दुकान बंद हो जाती है।”
कटनी 28/05/2026 * गाय के नाम पर देश में बढ़ते विवादों को खत्म करने के लिए *कटनी से सांप्रदायिक सौहार्द की ऐतिहासिक तस्वीर* सामने आई है। *जमीयत उलेमा-ए-हिंद* द्वारा गाय को ‘राष्ट्रीय पशु’ घोषित करने की मांग को *बजरंग दल ने भी जायज ठहराया* है। *बजरंग दल के जिला अखाड़ा प्रमुख अरुण अवस्थी* ने इस नेक पहल के लिए मुस्लिम समाज का आभार जताया है।

*”यह मांग नहीं, समाधान है” – बजरंग दल*
जिला अखाड़ा प्रमुख *अरुण अवस्थी* ने कहा:
*”जमीयत उलेमा-ए-हिंद की कटनी इकाई ने जो मांग उठाई है, वह 100% जायज और स्वागत योग्य है। गाय हमारी माता है, हमारी आस्था का केंद्र है। मुस्लिम भाइयों ने जिस तरह आगे बढ़कर हिंदू भावनाओं का सम्मान किया है, वह काबिल-ए-तारीफ है। हम दिल से उनका आभार व्यक्त करते हैं।”*
अवस्थी ने आगे जोड़ा, *”गाय को राष्ट्रीय पशु का दर्जा और गौवंश वध पर पूर्ण कानूनी प्रतिबंध – यही एक रास्ता है जिससे गाय के नाम पर होने वाली राजनीति, मॉब लिंचिंग और निर्दोषों की हत्या रुकेगी। अब सरकार को देर नहीं करनी चाहिए।”*
*जमीयत की 4 सूत्रीय मांग पर बजरंग दल भी सहमत*
1. गाय को तत्काल ‘राष्ट्रीय पशु’ घोषित किया जाए।
2. गौवंश की खरीद-बिक्री और वध पर देशव्यापी सख्त प्रतिबंध लगे।
3. गाय के नाम पर हिंसा करने वालों पर NSA लगे।
4. भाईचारे के लिए ठोस नीति बने।
*”हिंदू-मुस्लिम साथ आए तो नफरत हारेगी”*

जमीयत के *जनरल सेक्रेटरी अब्दुल कादिर खान* ने बजरंग दल के समर्थन पर कहा, *”जब दोनों समुदाय एक सुर में बोलेंगे तो विवाद की कोई जगह नहीं बचेगी। हमारा मकसद सिर्फ शांति है।”* वहीं *कैशियर हाफिज़ अब्दुल रहीम* बोले, *”मंदिर-मस्जिद से ज्यादा जरूरी इंसानियत है।”*
*कटनी बना ‘सद्भाव का मॉडल’*
मौलाना अरशद मदनी के रुख का समर्थन कर कटनी जमीयत ने मांग उठाई थी। अब *बजरंग दल के समर्थन के बाद कटनी देश के लिए ‘सांप्रदायिक सद्भाव का मॉडल’* बन गया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि *”जहां मुस्लिम संगठन गाय को राष्ट्रीय पशु बनाने की मांग करे और हिंदू संगठन उसका स्वागत करे, वहां नफरत की दुकान बंद हो जाती है।”*




