कटनी का अद्भुत मंदिर, नेत्र रूप में होती है मां कंकाली की आराधना
*मां कंकाली धाम निगहरा, जहां हर साल बढ़ जाते हैं जवारा कलश

जिले का एक ऐसा मंंदिर, जहां नेत्र रूप में होती है मां की आराधना
कटनी. धार्मिक मान्यता यह है कि जो व्यक्ति मां दुर्गा की पूजा – आराधना सच्ची श्रद्धा और निष्ठा से करता है उसे मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है। आज हम बात कर रहे हैं। कटनी से 28 किलोमीटर दूर बरही रोड स्थित है मां कंकाली धाम निगहरा की। नेत्र रूप में पूजी जाने वाली मां कंकाली का इतिहास बताते हुए गाँव के विभाष दुबे ने बताया कि कंकाली माता एक कुएं से प्रकट हुई थी। कहाँ जाता है कि गाँव में स्थित एक पुराने कुएं में बर्मन पानी भर रहा था पानी के साथ बाल्टी में मां प्रकट हो चुकी थी यह बात बर्मन को नहीं पता थी जिसके बाद बाल्टी का पानी घड़े में डाल दिया जो एक ब्राह्मण के घर पहुंच गई। रात में घड़े से गड़गड़ाहट की आवाज सुनाई दी जिसके बाद ब्राह्मण ने इसकी सूचना गाँव वालों को दी सभी ने देखा कि घड़े में एक आंख चमक रही है निकालने पर देखा कि नेत्र जैसे आकार में पत्थर घड़े के पानी में ऊपर तैर रहा है। घड़ा रात में ढांक कर रख दिया गया।
इसी दौरान रात में पंडे को मां ने स्वयं सपना दिया में इस गांव में आ चुकी हूं मेरी स्थापना पहाड़ में करवाओ सुबह होते ही यह खबर आस – पास के क्षेत्र में भी फैल गई निगहरा के ग्रामीणों ने विधि – विधान से मां कंकाली माता की स्थापना पहाड़ में कराई। पहाड़ी में नेत्र रुप में विराजी मां के धाम की प्रमुख विशेषता है हर वर्ष जवारा कलश बढ़ जाते हैं। मां की कृपा से अभिभूत हुए श्रद्धालुओं द्वारा कलश स्थापना कराएं जाते हैं। हर वर्ष 500 – 1000 कलश गिनती के बोए जाते हैं लेकिन 3 – 5 कलश बढ़ जाते हैं। विभाष दुबे, सचिन दुबे, तृप्ति दुबे, पुष्पलता दुबे, आदि ने बताया कि कई बार इस रहस्य को जानने का प्रयास किया गया, लेकिन आज तक किसी को पता नहीं चला। यह मंदिर करीब 80 वर्ष से अधिक समय से बना है ऐसे धाम में ब्रम्ह मूहूर्त से 300 सीढ़ी चढ़कर प्रतिदिन सैकड़ों श्रद्धालुओं का तांता लगा होता है।




