12 दिन बीत गए, कटनी में शराब दुकानों पर नहीं लगे QR कोड, ठेकेदारों की चांदी
कटनी में ओवररेटिंग का खेल, कलेक्टर से जांच की मांग

कटनी में आबकारी विभाग की लापरवाही का ‘खामियाजा’ भुगत रहे उपभोक्ता; दुकानों से गायब QR कोड, मनमाने दामों पर बिक रही शराब
कटनी। जिले में नए वित्तीय वर्ष के शराब ठेके शुरू हुए करीब 12 दिन बीत चुके हैं, लेकिन अब तक शराब दुकानों पर अनिवार्य ‘QR कोड रेट लिस्ट’ नदारद है। शासन के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद कटनी के आबकारी विभाग द्वारा ठेकेदारों को QR कोड आवंटित नहीं किए गए हैं, जिसका सीधा फायदा उठाकर शराब सिंडिकेट उपभोक्ताओं से सरेआम ‘ओवररेटिंग’ कर उनकी जेबें काट रहा है।
अधिकारी का तर्क: “अभी आवंटन प्रक्रिया में है”
मामला तब गरमाया जब खिरहनी स्थित दुर्गा चौक शराब दुकान पर ऊंचे दामों पर शराब बेचे जाने की शिकायत सामने आई। जब इस संबंध में जिला आबकारी अधिकारी से सवाल किया गया, तो उनका कहना था कि “अभी शराब दुकानों को QR कोड प्रदान नहीं किए गए हैं, जल्द ही इन्हें आवंटित कर दिया जाएगा।”

जिम्मेदार कौन? उपभोक्ताओं की लूट जारी
सवाल यह उठता है कि यदि विभाग ने 12 दिनों में QR कोड तैयार नहीं किए, तो इसकी सजा आम जनता क्यों भुगते? बिना रेट लिस्ट और बिना QR कोड के, शराब ठेकेदार अपनी मर्जी से 20 से 50 रुपये तक अतिरिक्त वसूल रहे हैं। आबकारी विभाग की इस सुस्ती ने ठेकेदारों को खुली छूट दे दी है। ऐसे में सवाल खड़ा होता है कि इस “आर्थिक लूट” की जवाबदारी आखिर किसकी है?

कलेक्टर से उच्च स्तरीय जांच की मांग
कटनी के जागरूक नागरिकों और उपभोक्ताओं का कहना है कि यह केवल एक तकनीकी देरी नहीं, बल्कि विभाग और ठेकेदारों की मिलीभगत का संकेत है। मांग की जा रही है कि:
जिला कलेक्टर इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच करवाएं कि 12 दिन बीतने के बाद भी QR कोड क्यों नहीं लगे? जिन दुकानों पर ओवररेटिंग हो रही है, उन पर दंडात्मक कार्यवाही की जाए।

जब तक QR कोड नहीं मिलते, तब तक दुकानों के बाहर हस्तलिखित रेट लिस्ट चस्पा करना अनिवार्य किया जाए।
यदि प्रशासन ने जल्द ही इस पर कड़ा रुख नहीं अपनाया, तो कटनी में ‘ओवररेटिंग’ का यह खेल और बड़ा रूप ले सकता है।




