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कागजों में बह रही नर्मदा नहर: जमीन पर एक बूंद नहीं, ठेकेदार बने ‘करोड़पति’; कटनी भाजपा अध्यक्ष का सोशल मीडिया पर फूटा गुस्सा

'अपनों' ने ही घेरा: भाजपा मंडल अध्यक्ष बोले- नर्मदा परियोजना में नहर नहीं, सिर्फ घोटाला बना; किसान अब भी पानी को तरसे

नहर बनी नहीं, ठेकेदार करोड़पति बन गए: नर्मदा परियोजना में देरी पर भड़के भाजपा मंडल अध्यक्ष, सोशल मीडिया ग्रुप में उठाए सवाल

 

*कटनी।* जिले की बहुप्रतीक्षित नर्मदा परियोजना अब भ्रष्टाचार और देरी का प्रतीक बन गई है। न नहर बनी, न किसानों के खेतों तक पानी पहुंचा, लेकिन ठेकेदार करोड़ों के मालिक बन गए। इस मुद्दे को लेकर अब भाजपा के अपने ही नेता मुखर हो गए हैं।

 

*भाजपा मंडल अध्यक्ष ने सोशल मीडिया पर खोला मोर्चा*  

कटनी भाजपा मंडल ग्रामीण अध्यक्ष श्री राम पटेल ने एक सोशल मीडिया ग्रुप में नर्मदा नहर निर्माण में हो रही बेतहाशा देरी पर नाराजगी जताई है। उन्होंने लिखा- _“सरकार की प्राथमिकता वाली योजना में भी अगर सालों बाद किसानों को पानी न मिले तो क्या फायदा? नहर के नाम पर सिर्फ कागजों में काम हुआ, जमीन पर कुछ नहीं। ठेकेदार जरूर मालामाल हो गए।”_

*किसानों के सपने अधूरे, ठेकेदारों की बल्ले-बल्ले*  

नर्मदा परियोजना से कटनी जिले के हजारों किसानों को सिंचाई का पानी मिलना था। बरसों से किसान आस लगाए बैठे हैं कि नहर बनेगी तो फसल लहलहाएगी। लेकिन हकीकत ये है कि कई जगह नहर का अता-पता नहीं है। जहां बनी भी है वहां टूटी-फूटी पड़ी है। पानी खेत तक पहुंचने का सवाल ही नहीं उठता। वहीं करोड़ों का भुगतान लेकर ठेकेदार जरूर करोड़पति बन गए।

 

*अपनों ने ही उठाए सवाल तो हड़कंप*

भाजपा मंडल अध्यक्ष का सोशल मीडिया पर पोस्ट वायरल होते ही प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में हड़कंप मच गया। पार्टी के अंदरखाने भी चर्चा है कि जब सत्ता पक्ष के नेता ही योजना की पोल खोल रहे हैं तो हालात कितने गंभीर होंगे।

*बड़े सवाल खड़े हो रहे हैं:*  

1. नहर निर्माण पूरा हुए बिना करोड़ों का भुगतान कैसे हो गया?

2. गुणवत्ता की जांच किसने की और ठेकेदार को क्लीन चिट कैसे मिली?

3. किसानों के खेत सूखे हैं, तो जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई कब होगी?

4. क्या जांच होगी कि पैसा नहर में लगा या ठेकेदारों की जेब में गया?

अब देखना है कि भाजपा मंडल अध्यक्ष की इस पोस्ट के बाद जिला प्रशासन और जल संसाधन विभाग नींद से जागता है या नर्मदा परियोजना भी दूसरी सरकारी योजनाओं की तरह सिर्फ ‘घोटालों की नहर’ बनकर रह जाएगी।

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