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कन्हवारा वसीयत कांड: कागज के शेर निकले दोनों सगे भाई, कोर्ट में दाखिल हुआ ‘ जातीय रिश्तों ‘ का कच्चा चिट्ठा

कलेक्टर को नोटिस, तहसीलदार को सम्मन: गंगीबाई की जमीन पर 'कब्जा युद्ध', फर्जी वसीयत बनी

1600 रुपये का केस, लाखों की जमीन: कटनी में फर्जी वसीयत से हड़पे खेत पर अब ‘कानूनी कुर्की’ की तैयारी

 

कन्हवारा में ‘मौसी की जमीन, दो भाइयों का फर्जीवाड़ा’: फर्जी वसीयत से 0.04 हेक्टेयर हड़पी, तहसीलदार-कलेक्टर भी कोर्ट में तलब, 1600 रु. का दावा बना ‘कानूनी बम’

 

*कटनी, 5 मई 2026 * रिश्तों को शर्मसार कर देने वाला जमीन हड़पने का मामला सामने आया है। ग्राम कन्हवारा निवासी कमलेश कुशवाहा ने अपने ही गाँव के दो सगे भाइयों एडवोकेट कैलाशचन्द्र कुशवाहा और जोबी कलां ग्राम पंचायत सचिव कमल कुमार कुशवाहा पर मौसी की जमीन फर्जी वसीयत से हड़पने का सनसनीखेज आरोप लगाया है।

 

*क्या है पूरा ‘जमीन कांड’?*

वादी कमलेश कुशवाहा की मौसी गंगीबाई काछी का 30.08.2021 को निधन हो गया। आरोप है कि प्रतिवादी दोनों भाइयों कैलाश और कमल ने कूटरचित दस्तावेज और फर्जी वसीयत तैयार कर ली। इसी फर्जी वसीयत के आधार पर तहसीलदार कटनी ने ग्राम कन्हवारा की खसरा नंबर 564 की 0.04 हेक्टेयर जमीन प्रतिवादियों के नाम चढ़ा दी। हैरानी की बात कि नामांतरण के बाद जमीन का रकबा 0.04 से घटकर 0.02 हेक्टेयर रह गया

 

*तहसीलदार-कलेक्टर भी लपेटे में*

वादी ने सिर्फ रिश्तेदारों पर ही नहीं, बल्कि तहसीलदार कटनी और कलेक्टर कटनी को भी प्रतिवादी बनाया है। आरोप है कि तहसीलदार ने 16.06.2023 को फर्जी वसीयत के आधार पर आदेश पारित कर दिया। वादी ने अधिकारियों पर मिलीभगत का आरोप लगाते हुए शिकायत की, पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।

 

*1600 रु. का दावा, मंशा करोड़ों की*

वादी ने कोर्ट में 1000 रु. की घोषणा और 600 रु. की स्थाई निषेधाज्ञा यानी कुल 1600 रु. का दावा दायर किया है। मांग की है कि फर्जी वसीयत शून्य घोषित हो, जमीन वादी के नाम घोषित हो और प्रतिवादी कब्जा-खेती में बाधा न डालें।

 

*एडवोकेट की हुंकार*  

वादी के अधिवक्ता राजकुमार बख्शी ने कलेक्टर को भेजे नोटिस में कहा कि वाद से शासन को कोई क्षति नहीं होगी। यह शुद्ध रूप से फर्जीवाड़े का मामला है। नोटिस 10/2/26 को जारी हुआ है।

 

*अब आगे क्या?*

नोटिस के बाद कमलेश कुशवाहा प्रथम व्यवहार न्यायाधीश कनिष्ठ खण्ड कटनी की कोर्ट में केस दाखिल करेगा। अगर आरोप साबित हुए तो फर्जी वसीयत बनाने वालों पर आपराधिक केस भी बन सकता है। तहसीलदार के आदेश की वैधता भी कटघरे में है।

*’रिश्ता बड़ा या जमीन?’* कटनी का ये मामला अब कोर्ट में तय करेगा कि मौसी की वसीयत असली थी या भाइयों का फर्जीवाड़ा।

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