हार्वेस्टर संचालकों की मनमानी से जिले में पशु पालन पर संकट, हार्वेस्टर संचालकों पर सख्त नियंत्रण की मांग
पशु चारे (भूसे ) की कमी से जिले में दुग्ध उत्पादन पर असर पड़ने का खतरा

गेहूं कटाई में नियमों का उल्लंघन: गौ वंश के भूसा का हो रहा नुकसान, पशुपालकों को परेशानी
कटनी/कन्हवारा . जिले में गेहूं कटाई का सीजन चल रहा है, लेकिन हार्वेस्टर संचालक नियमों का पालन नहीं कर रहे हैं। इससे गौ वंश के भूसा का नुकसान हो रहा है और पशुपालकों को अपने मवेशियों के लिए परेशानी हो रही है।
हार्वेस्टर संचालक गेहूं की कटाई के दौरान भूसा को खेत में ही छोड़ देते हैं, जिससे गौ वंश के लिए आवश्यक भूसा का नुकसान हो रहा है। पशुपालकों का कहना है कि उन्हें अपने मवेशियों के लिए भूसा खरीदना पड़ रहा है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति पर भी असर पड़ रहा है।

*नियमों का उल्लंघन:*
– हार्वेस्टर संचालक गेहूं की कटाई के दौरान भूसा को खेत में ही छोड़ देते हैं।
– भूसा को खेत में ही जलाया जा रहा है, जिससे वायु प्रदूषण भी हो रहा है।
– पशुपालकों को अपने मवेशियों के लिए भूसा खरीदना पड़ रहा है।
*पशुपालकों की परेशानी:*

– भूसा का नुकसान होने से पशुपालकों को अपने मवेशियों के लिए भूसा खरीदना पड़ रहा है।
– भूसा की कीमतें बढ़ गई हैं, जिससे पशुपालकों की आर्थिक स्थिति पर असर पड़ रहा है।
– मवेशियों के स्वास्थ्य पर भी असर पड़ रहा है।
*क्या किया जा सकता है?*

– बिना स्ट्रा रीपर के गेहूं कटाई के लिए हार्वेस्टर चलाने पर तत्काल कड़ी कार्यवाही करना चाहिए।
– हार्वेस्टर संचालकों पर सख्त नियंत्रण किया जाए।
– भूसा को खेत में ही न छोड़ने के लिए नियम बनाए जाएं।
– पशुपालकों को भूसा की व्यवस्था करने के लिए सहायता प्रदान की जाए।




