आबकारी अधिकारी का आश्वासन निकला खोखला, ‘पगड़ी’ के दम पर फल-फूल रहीं पैकारियां।
बिना QR कोड और बिल के मनमाने रेट पर बिक रही शराब, जिम्मेदारों तक पहुँच रहा 'मासिक लिफाफा'।

शराब माफियाओं के समानांतर कानून के आगे आबकारी विभाग नतमस्तक, जिला आबकारी अधिकारी के वादे निकले खोखले
कटनी। जिले में शराब ठेकेदारों की मनमानी और आबकारी विभाग की मिलीभगत का आलम यह है कि यहाँ सरकारी नियमों के बजाय ठेकेदारों का अपना ‘समानांतर कानून‘ चल रहा है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जिले की कमान संभाल रहीं जिला आबकारी अधिकारी सुश्री विभा मरकाम के आश्वासन भी अब तक बेअसर साबित हुए हैं।
अधिकारी का वादा बनाम जमीनी हकीकत
विगत दिनों जब हमारे संवाददाता ने जिला आबकारी अधिकारी सुश्री विभा मरकाम से शराब दुकानों में रेट लिस्ट वाले QR कोड न होने पर सवाल किया था, तो उन्होंने जल्द ही इन्हें आवंटित करने और व्यवस्था सुधारने का भरोसा दिया था। लेकिन हकीकत यह है कि आज दिनांक तक कोई औपचारिक व्यवस्था नहीं की गई। दुकानों से QR कोड का गायब होना सीधे तौर पर शराब प्रेमियों की जेब पर डाका डालने की खुली छूट है, जिसका फायदा उठाकर ठेकेदार मनमाने रेट वसूल रहे हैं।
‘पगड़ी’ के दम पर फल-फूल रही अवैध पैकारियां
सूत्रों का दावा है कि जिले में अवैध पैकारियों का संचालन किसी छिपे हुए तरीके से नहीं, बल्कि बाकायदा ‘पगड़ी’ (एडवांस कमीशन) जमा करवाकर किया जा रहा है। ठेकेदारों ने ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में अपने गुर्गों के माध्यम से शराब बिकवाने का ऐसा नेटवर्क तैयार किया है, जिसे देखकर लगता है कि प्रशासन का डर पूरी तरह खत्म हो चुका है। इन अवैध पैकारियों के संचालन के लिए हर महीने एक मोटी रकम जिम्मेदारों की जेब तक पहुँच रही है, जिसके कारण अवैध शराब का यह काला कारोबार बेधड़क जारी है।
कानून को ठेंगा दिखा रहे ठेकेदार
शराब ठेकेदारों के हौसले इतने बुलंद हैं कि वे सरकारी नियमों को ठेंगा दिखाकर अपने बनाए नियमों से दुकान संचालित कर रहे हैं। न बिल देने की चिंता, न समय सीमा का पालन और न ही रेट लिस्ट की अनिवार्यता। ऐसा प्रतीत होता है कि कटनी जिला आबकारी विभाग ने ठेकेदारों को जिले की जनता को लूटने का ‘एग्रीमेंट‘ दे रखा है।
अब सवाल यह उठता है कि क्या उच्चाधिकारी इस सांठगांठ पर संज्ञान लेंगे या फिर जिला आबकारी अधिकारी के ‘जल्द व्यवस्था’ वाले दावे फाइलों में ही दबे रहेंगे?




