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“एक जिद थी… पत्रकारिता को जीने की”: ‘यश भारत’ संपादक आशीष सोनी के 30 साल, जन्मदिन पर छलका संघर्ष

'कवि आशीष अंगारा' के जन्मदिन पर भावुक हुए पीएचडी गुरु सुरेन्द्र राजपूत, बोले- "आधी रोटी खाकर खबर खोजते थे"

श्रमजीवी पत्रकार संघ अध्यक्ष डॉ. सुरेन्द्र राजपूत बोले- ‘आशीष ने पत्रकारिता को जिया है’, जिला पंचायत उपाध्यक्ष अशोक विश्वकर्मा सहित शहर के वरिष्ठ पत्रकार रहे मौजूद*

 

*कटनी:* ‘यश भारत’ के संपादक एवं वरिष्ठ पत्रकार आशीष सोनी का जन्मदिन अपनों के बीच बेहद आत्मीय माहौल में मनाया गया। इस अवसर पर आशीष सोनी ने अपनी तीन दशक लंबी पत्रकारिता यात्रा के खट्टे-मीठे अनुभव साझा किए। कार्यक्रम में शहर के वरिष्ठ पत्रकार, जनप्रतिनिधि और गणमान्य नागरिक बड़ी संख्या में शामिल हुए।

*साथियों ने किया सम्मान, केक खिलाकर दी बधाई*

कार्यक्रम के दौरान श्रमजीवी पत्रकार संघ कटनी के जिला अध्यक्ष एवं ‘कटनी न्यूज’ के चीफ एडिटर *डॉ. सुरेन्द्र सिंह राजपूत ‘पीएचडी गुरु’* ने गुलदस्ता भेंट कर आशीष सोनी का सम्मान किया। इसके साथ ही साथियों ने उन्हें माला पहनाई और केक खिलाकर जन्मदिन की शुभकामनाएं दीं। आशीष सोनी ने भी सभी का आभार जताते हुए अपने अनुभव साझा किए।

*डॉ. सुरेन्द्र राजपूत बोले: ‘संघर्ष से शिखर तक का सफर’*

इस मौके पर डॉ. सुरेन्द्र राजपूत ने आशीष सोनी के साथ अपने तीन दशकों से अधिक के साथ का जिक्र किया। उन्होंने कहा, “आशीष और मेरा साथ सिर्फ परिचय का नहीं, बल्कि पत्रकारिता के संघर्ष, समर्पण और सतत सीख की साझा यात्रा है। प्रजापक्ष के प्रकाशन से लेकर आज ‘यश भारत’ के संपादक तक का सफर आसान नहीं था। खुद खबर लाना, खुद पेस्टिंग करना, अखबार बांटना – आशीष ने हर काम किया। एक-एक पैसे के लिए संघर्ष के वो दिन आज भी याद हैं।”

डॉ. राजपूत ने आगे बताया कि कैसे आशीष सोनी सुबह ट्रेन पकड़कर शहडोल जाते, दिनभर काम कर वापस कटनी लौटते थे। जब लगा कि पत्रकारिता के साथ न्याय नहीं हो पा रहा तो शहडोल में ही कमरा लेकर कर्मभूमि बना ली। *”आशीष को पत्रकारिता विरासत में जरूर मिली, लेकिन उन्होंने अपनी पहचान खुद गढ़ी। दैनिक भारती, एक्सप्रेस न्यूज, नवभारत, दैनिक भास्कर और अब यश भारत में अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज कराई।”*

*’कवि आशीष अंगारा’ की लेखनी में धार और संवेदना*

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डॉ. राजपूत ने बताया कि वरिष्ठ कवि मनोहर मनोज ने आशीष सोनी को “कवि आशीष अंगारा” की उपाधि दी थी। उनकी लेखनी में धार है, संवेदना है और जमीन की गंध है। खबर को इस तरह प्रस्तुत करना कि पाठक उसे पढ़ने के लिए ठहर जाए – यह कला विरले लोगों में होती है।

*ये रहे मौजूद:*

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कार्यक्रम में जिला पंचायत उपाध्यक्ष *अशोक विश्वकर्मा*, पूर्व पार्षद *सुश्री शिल्पी सोनी*, वरिष्ठ पत्रकार *सूरज*, *आशीष रैकवार*, *राजू राजेश तिवारी*, *निडर आवाज महेंद्र सोनी*, *संतोष तोमर* सहित शहर के अनेक वरिष्ठ पत्रकार एवं गणमान्य नागरिक मौजूद रहे। सभी ने गीत-संगीत के बीच अपने प्रिय साथी को शुभकामनाएं प्रेषित कीं।

*आशीष सोनी ने कहा:*

अपने संबोधन में आशीष सोनी ने कहा कि पत्रकारिता उनके लिए पेशा नहीं, धर्म है। “सुबह जल्दी उठना, ट्रेन पकड़कर शहडोल पहुंचना, दिनभर काम कर कटनी लौटना – वो दौर संघर्ष भरा था। प्रजापक्ष बंद होने पर टूट गया था, लेकिन फिर उठा। प्रिंट से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया, सी टी एन और फिर नवभारत शहडोल ब्यूरो चीफ – जीवन ने नया मोड़ लिया। आज जो कुछ हूं, आप सभी के प्यार और साथ की बदौलत हूं।”

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