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सिंगरौली DEO का ‘तुगलकी फरमान’ 24 घंटे में ध्वस्त: पदभार लेते ही पत्रकारों पर लगाया बैन, विरोध के बाद बोलीं- ‘लिपिक की गलती थी’

पत्रकारिता पर पहरा: नई DEO कविता सिंह का पहला आदेश- स्कूलों में मीडिया नो एंट्री, बवाल के बाद सफाई- 'आदेश सुधारेंगे, लिपिक ने जोड़ा था पत्रकार शब्द'

पदभार ग्रहण करते ही सिंगरौली DEO कविता सिंह का विवादित फरमान: स्कूलों में पत्रकारों की एंट्री बैन, विरोध के बाद पलटीं- बोलीं ‘लिपिक ने जोड़ा पत्रकार शब्द, आदेश संशोधित होगा’

 

*सिंगरौली, 27 जून 2026।* जिला शिक्षा अधिकारी का पदभार ग्रहण करते ही *कविता सिंह* ने 25 जून को ऐसा आदेश जारी कर दिया जिससे जिले भर में बवाल मच गया। आदेश में बिना सक्षम अनुमति के *पत्रकारों एवं सामान्य जन के सरकारी स्कूलों में प्रवेश पर रोक* लगा दी गई थी।

*विरोध के बाद DEO का यू-टर्न*

खबर वायरल होने और पत्रकार संगठनों के कड़े विरोध के बाद जिला शिक्षा अधिकारी कविता सिंह बैकफुट पर आ गईं। *मीडिया से बातचीत में उन्होंने सफाई देते हुए कहा-*

*”आदेश में ‘पत्रकार’ शब्द लिपिक द्वारा त्रुटिवश जोड़ दिया गया था। हमारा मकसद केवल छात्र सुरक्षा था। इस आदेश को तुरंत संशोधित किया जाएगा और पत्रकारों के लिए अलग से स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी होंगे।”*

*क्या था विवादित आदेश*

DEO के आदेश क्रमांक 1473 में कहा गया था कि पत्रकारों द्वारा ‘अनावश्यक निरीक्षण’ से शासकीय कार्य में अवरोध होता है। इसी आधार पर सभी प्राचार्यों को निर्देश दिए गए थे कि *छात्र सुरक्षा का हवाला देकर पत्रकारों को बिना अनुमति स्कूल में न घुसने दें।*

*पदभार लेते ही विवादों में घिरीं DEO*

गौरतलब है कि कविता सिंह ने *हाल ही में सिंगरौली DEO का पदभार ग्रहण किया है* और चार्ज लेते ही उनका पहला बड़ा आदेश विवादों में घिर गया। पत्रकारों का आरोप था कि *”पहले ही दिन लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर ताला लगाने का प्रयास किया गया।”*

*पत्रकारों का आरोप – ‘काली करतूत छिपाने की साजिश’*

जिले के वरिष्ठ पत्रकारों का कहना था कि *”ये आदेश स्कूलों में चल रही अव्यवस्थाओं को छिपाने की साजिश है।”* मिड-डे मील में गड़बड़ी, शिक्षकों का गैरहाजिर रहना, शौचालयों की दुर्दशा जैसी खबरें अब बाहर कैसे आएंगी?

*’सक्षम अनुमति’ का पेंच – RTI पर भी सवाल*

आदेश में यह स्पष्ट नहीं था कि *’सक्षम अनुमति’ कौन देगा*। पत्रकार संगठनों ने सवाल उठाया था कि जब *सूचना का अधिकार अधिनियम 2005* नागरिकों को सरकारी संस्थानों से जानकारी लेने का हक देता है, तो निरीक्षण पर पूरी तरह रोक कैसे लगाई जा सकती है?

*विरोध का दिखा असर*  

पत्रकार संघ के विरोध के बाद DEO ने 24 घंटे के अंदर ही *आदेश में संशोधन का आश्वासन* दे दिया है। अब देखना होगा कि संशोधित आदेश में पत्रकारों को लेकर क्या रुख रहता है।

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