संडे को ‘ऑफलाइन’ हुए कटनी के स्वास्थ्य हाकिम: अस्पताल में मरीजों पर बदला जा रहा था एक्सीडेंट का बयान, फोन बंद कर बैठे रहे CMHO और सिविल सर्जन
शर्मनाक! कटनी जिला अस्पताल की ड्यूटी डॉक्टर की मनमानी; एक्सीडेंट को बताया 'Self Injury', पर्ची पर खुद लिखवाई झूठी कहानी

कटनी जिला अस्पताल में बड़ी लापरवाही: एक्सीडेंट के घायलों पर बयान बदलने का दबाव बना रहीं ड्यूटी डॉक्टर; संडे के नाम पर CMHO और सिविल सर्जन ने फेरा मुंह
कटनी (मध्य प्रदेश)। जिला अस्पताल कटनी में रविवार को चिकित्सा धर्म और प्रशासनिक नियमों को शर्मसार करने वाला एक गंभीर मामला सामने आया है। बीती रात कुठला थाना क्षेत्र में हुए एक कार हादसे में घायल होकर इलाज कराने पहुंचे मरीजों पर जिला अस्पताल की ड्यूटी डॉक्टर सुनीता बरोड़ा द्वारा जबरन बयान बदलने और कानूनी कार्रवाई न करने का दबाव बनाने का सनसनीखेज आरोप लगा है।

हद तो तब हो गई जब अस्पताल में चल रही इस मनमानी की शिकायत के लिए जिले के स्वास्थ्य महकमे के सबसे जिम्मेदार अफसरों— सीएमएचओ (CMHO) डॉ. राज सिंह और सिविल सर्जन (CS) डॉ. यशवंत वर्मा से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन दोनों ही आला अधिकारियों ने संडे की छुट्टी का हवाला देते हुए फोन अटेंड करना तक मुनासिब नहीं समझा।नई सब्जी मंडी के पास पलटी थी होंडा सिटी कारप्राप्त जानकारी के अनुसार, विगत रात्रि लगभग 10:00 बजे कुठला थाना क्षेत्र के अंतर्गत नई सब्जी मंडी के नजदीक एक फोर-व्हीलर होंडा सिटी कार (गाड़ी संख्या: MP 04 CN 0870) अनियंत्रित होकर डिवाइडर से टकराकर पलट गई थी।

इस दर्दनाक हादसे में कार सवार तीन लोगों के हाथ-पैर में चोटें आईं। घायलों को उपचार और मेडिकल रिकॉर्ड के लिए रविवार दोपहर जिला अस्पताल कटनी के ट्रॉमा ब्लॉक लाया गया था। नियमानुसार सड़क दुर्घटना (RTA) के ऐसे मामलों को तत्काल ‘मेडिकल लीगल केस’ (MLC) के तहत दर्ज कर पुलिस को सूचना देनी अनिवार्य होती है।
एक्सीडेंट को ‘Self Injury’ बताने की साज़िश,
पर्ची पर खुद लिखवा दी मनमानी कहानी, जिला अस्पताल में ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर सुनीता बरोड़ा ने नियमों को ताक पर रखकर मरीज चंदन पाठक व अन्य घायलों की ओपीडी पर्ची (UHID: 20260113784) पर खुद ही ‘Self Injury’ (स्वयं को पहुंचाई चोट) दर्ज कर दिया और कंप्यूटर रिकॉर्ड में ‘MLC Patient: NO’ मार्क कर दिया। इतना ही नहीं, डॉक्टर ने ओपीडी पर्ची के निचले हिस्से पर खुद मरीज के हाथ से हिंदी में लिखावाया— “मैंने स्वयं की गलती से चोट लगा है, कोई पुलिस कार्यवाही नहीं चाहते हैं, केवल इलाज।” इसके बाद घायलों और उनके परिजनों पर इस मनगढ़ंत बयान पर जबरन हस्ताक्षर और अंगूठा लगाने का भारी दबाव बनाया गया।

इंश्योरेंस क्लेम हड़पने और पुलिस कार्रवाई से बचने का खेल!जानकारों का कहना है कि यदि मरीज इस पर्ची पर हस्ताक्षर कर देते, तो भविष्य में उन्हें वाहन दुर्घटना का कोई भी इंश्योरेंस क्लेम या स्वास्थ्य बीमा का लाभ नहीं मिलता। अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ने और कागजी कार्रवाई से बचने के लिए ड्यूटी डॉक्टर ने मरीजों के कानूनी अधिकारों को दांव पर लगा दिया। जब परिजनों ने इसका विरोध किया तो डॉक्टर ने उन्हें सीधे थाने जाने का कहकर टरका दिया। अस्पताल परिसर में मौजूद पुलिस चौकी ने भी मामले को टालते हुए पीड़ितों को सीधे कुठला थाने जाने की सलाह दे डाली।

संडे को ‘ऑफलाइन’ हुए जिम्मेदार: फोन तक उठाना नहीं समझा ज़रूरीइस पूरे घटनाक्रम के दौरान जब अस्पताल में चल रही इस प्रशासनिक मनमानी और पीड़ित पक्ष पर बनाए जा रहे अनुचित दबाव को लेकर कटनी के सिविल सर्जन डॉ. यशवंत वर्मा और सीएमएचओ डॉ. राज सिंह से उनके मोबाइल नंबरों पर संपर्क साधने की कोशिश की गई, तो दोनों ही जिम्मेदार अफसरों ने फोन रिसीव नहीं किया।
यह रवैया बेहद चिंताजनक है कि एक तरफ पीड़ित अस्पताल के भीतर डॉक्टरों के दबाव और बाहर पुलिस थानों के चक्कर काटने को मजबूर हैं, वहीं दूसरी तरफ आपातकालीन सेवाओं के मुखिया संडे के दिन फोन कॉल से दूरी बनाए हुए हैं। पीड़ितों ने अब इस गंभीर मामले की शिकायत मुख्यमंत्री हेल्पलाइन (181) और कुठला थाना पुलिस से करने का निर्णय लिया है।




