खिरहनी शराब दुकान की मनमानी पर आबकारी विभाग का बयान: ‘रेट अभी फाइनल नहीं, अवैध पैकारी बताओ कहाँ है तो करेंगे कार्रवाई’
खिरहनी शराब दुकान से अवैध पैकारी, स्थानीय लोगों में आक्रोश

दुर्गा चौक खिरहनी शराब दुकान संचालक की दबंगई: शहर से गांव तक फैला अवैध ‘पैकारी’ का जाल,
कटनी। नगर के दुर्गा चौक खिरहनी शराब दुकान द्वारा ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में फैलाई गई अवैध ‘पैकारी’ और मनमाने रेट पर शराब बिक्री के मामले में जिला आबकारी अधिकारी विभा मरकाम ने अपना पक्ष रखा है। हालांकि, अधिकारी के तर्कों से स्थानीय निवासियों में असंतोष कम होने के बजाय और बढ़ता नजर आ रहा है।
रेट लिस्ट न होने पर आबकारी अधिकारी महोदया का बयान
शराब दुकानों पर बिना रेट लिस्ट के और बिना बिल दिए शराब बेचे जाने के गंभीर आरोपों पर जिला आबकारी अधिकारी विभा मरकाम ने जानकारी देते हुए बताया कि “फिलहाल शराब के रेट आधिकारिक तौर पर फाइनल नहीं हुए हैं, यही कारण है कि दुकानों पर अभी रेट लिस्ट नहीं टंगी है।” उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि जल्द ही सभी शराब दुकानों में QR कोड की व्यवस्था की जाएगी, जिसे स्कैन कर ग्राहक स्वयं शराब के सही रेट की जानकारी प्राप्त कर सकेंगे और पारदर्शिता बनी रहेगी वैसे भी पूर्व से दुकानों में ये व्यवस्था है।
अवैध पैकारी पर माँगी जानकारी
क्षेत्र में धड़ल्ले से चल रही अवैध पैकारियों और शराब की अवैध बिक्री के खेल पर अधिकारी ने कहा कि विभाग कार्रवाई के लिए तैयार है, लेकिन उन्होंने इसके लिए जानकारी की कमी का हवाला दिया। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि “जहाँ भी अवैध रूप से शराब की बिक्री या पैकारी चल रही है, उसकी सटीक जानकारी विभाग को उपलब्ध कराई जाए, हम तुरंत कड़ी कार्यवाही करेंगे।”
जनता का सवाल: ‘क्या विभाग को जानकारी ही नहीं?’
अधिकारी के इस बयान के बाद स्थानीय लोगों में चर्चा है कि क्या आबकारी विभाग का जमीनी तंत्र इतना कमजोर है कि उन्हें खुद अपने क्षेत्र में चल रही अवैध पैकारियों की जानकारी नहीं है? मीडिया की सुर्खियों में होने के बावजूद ‘जानकारी माँगने’ की बात को स्थानीय लोग प्रशासन की ‘कुंभकर्णीय निद्रा’ और अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ने जैसा देख रहे हैं।
आंदोलन की तैयारी जारी
आबकारी अधिकारी के बयान के बावजूद स्थानीय लोग संतुष्ट नहीं हैं। उनका कहना है कि अवैध पैकारियों की लोकेशन जगजाहिर है, फिर भी कार्रवाई न होना मिलीभगत की ओर इशारा करता है। क्षेत्रवासी जल्द ही ज्ञापन सौंपकर इन अवैध ठिकानों की सूची प्रशासन को देंगे और फिर भी कार्रवाई न होने पर उग्र आंदोलन की रणनीति पर अडिग हैं।




