वेयरहाउस बना ‘कबाड़खाना’: लाखों का धान बर्बाद, आरबी एसोसिएट ने नहीं किया उठाव
'सत्येंद्र राज' में बर्बाद हुआ धान: विपणन संघ के मैनेजर की लापरवाही से सरकारी खजाने को चूना

मझगवां वेयरहाउस में ‘धान घोटाला’: हजारों क्विंटल धान भीगकर सड़ा, कैंप मैनेजर की लापरवाही, अधिकारी मौन
*कटनी।* समर्थन मूल्य पर धान खरीदी के बाद मझगवां वेयरहाउस से धान का उठाव नहीं होने से बड़ा नुकसान हो गया है। कैंप में हजारों क्विंटल धान खुले में पड़ा था जो पिछले दिनों हुई लगातार बारिश में पूरी तरह भीग गया। भीगे धान में अब अंकुरण शुरू हो गया है और धान खराब होने की कगार पर है।
*वेयरहाउस में संसाधन नहीं, धान सड़ रहा*
वेयरहाउस में रखे धान को सुरक्षित रखने के पर्याप्त इंतजाम नहीं थे। ओपन कैंप में पड़े धान पर बारिश का कहर टूटा और अब हालात ये हैं कि बोरियों में रखा धान अंकुरित हो रहा है। किसानों की मेहनत पर पानी फिर गया है।
*कैंप मैनेजर की लापरवाही उजागर, अफसर फोन नहीं उठाते*
विपणन संघ के कैंप मैनेजर सत्येंद्र प्रजापति की भारी लापरवाही उजागर हुई है। हजारों क्विंटल धान बर्बाद हो रहा है लेकिन जिम्मेदार अधिकारी मौन साधे हुए हैं। फोन तक उठाने की जहमत नहीं कर रहे।
*आरबी एसोसिएट भी बेपरवाह*
वहीं धान का उठाव करने वाली आरबी एसोसिएट कंपनी भी गंभीरता नहीं दिखा रही। समय पर उठाव न होने से ही ये नौबत आई है। कंपनी की बेपरवाही से सरकारी खजाने को लाखों का चूना लगना तय है।
*अब फिर लगेगा लाखों का खर्चा*
बताया जा रहा है कि अब भीगे धान को सुखाने के लिए फिर से ढेर लगवाना पड़ेगा। नए बारदाने में भराई होगी। इससे हम्माली और बारदाने का खर्च बढ़ गया। कुल मिलाकर लाखों रुपए का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। सुबह से परिसर में भीगे बोरों को शेड में जमाने का काम चल रहा है, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी है।
*किसकी जिम्मेदारी?*
सवाल ये है कि खुले में पड़े धान को सुरक्षित रखने के इंतजाम क्यों नहीं किए गए? समय पर उठाव क्यों नहीं हुआ? कैंप मैनेजर और उठाव कंपनी पर कार्रवाई कब होगी? या फिर ये मामला भी फाइलों में दबकर किसानों के नुकसान की एक और कहानी बन जाएगा?




