“सरकारी मेडिकल कॉलेज नहीं तो भाजपा को वोट नहीं : कटनी में छिड़ा ‘वोट बहिष्कार’ का बिगुल”

निजी कंपनी को 25 एकड़ जमीन पर काम शुरू, विंदेश्वरी पटेल बोले- “छल-कपट बर्दाश्त नहीं”*
*कटनी, 3 जून 2026।* जिले में मेडिकल कॉलेज के मुद्दे पर सियासी पारा चढ़ गया है। एक तरफ कछगवां क्षेत्र में 25 एकड़ सरकारी भूमि पर निजी कंपनी द्वारा मेडिकल कॉलेज निर्माण का काम शुरू हो चुका है, वहीं दूसरी तरफ सामाजिक कार्यकर्ता विंदेश्वरी पटेल ने “सरकारी मेडिकल कॉलेज नहीं तो सत्ता को वोट नहीं” आंदोलन की चेतावनी दे दी है।
*क्या है मामला?*
अखबारों में 3 जून 2026 को छपी खबर के मुताबिक कछगवां क्षेत्र में चिह्नित 25 एकड़ सरकारी भूमि पर गोपनीयता और तेजी से काम शुरू हो गया है। प्रशासन इस पर मौन है, जबकि निजी कंपनी ने मोर्चा संभाल लिया है।।
*विंदेश्वरी पटेल का विवादित फेसबुक पोस्ट बना चर्चा का विषय*

इस खबर के सामने आते ही सामाजिक कार्यकर्ता विंदेश्वरी पटेल ने फेसबुक पर पोस्ट डालकर आंदोलन का ऐलान कर दिया। उन्होंने लिखा – “कटनी जिले में सरकारी मेडिकल कॉलेज नहीं तो भाजपा (सत्ता) को वोट नहीं का आंदोलन शीघ्र शुरू किया जाएगा।”
पोस्ट में उन्होंने सरकार पर “छल-कपट और तानाशाही रूप से निजी मेडिकल कॉलेज खोले जाने” का आरोप लगाया। उनका कहना है कि “जिले की 90% जनता भोली-भाली अशिक्षित और अज्ञानी है जिसे अपने वोट की कीमत नहीं मालूम। कभी धर्म, कभी रुपया, कभी गाय के नाम पर वोट दे देती है।”
*आंदोलन की रूपरेखा तैयार*
विंदेश्वरी पटेल ने पोस्ट में लिखा कि “शिक्षित और जागरूक लोग इसमें निजीकरण की अच्छाइयां और बुराइयां का ज्ञान रखते हैं। मेरे विचार में इसका पुरजोर विरोध होना चाहिए, जिसके लिए हम कुछ दिनों में कटनी में ‘शासकीय मेडिकल कॉलेज नहीं तो सत्ता को वोट नहीं’ का आंदोलन चलाने की रूपरेखा बना रहे हैं।”
*जनता से मांगा मार्गदर्शन*
उन्होंने कटनी जिले के लोगों से इस मुद्दे पर मत मांगा है और उचित मार्गदर्शन देने की अपील की है।
*सवाल जो उठ रहे हैं:*
1. 25 एकड़ सरकारी जमीन निजी कंपनी को किस आधार पर दी गई?
2. जब सरकारी मेडिकल कॉलेज की मांग सालों से थी तो निजी कॉलेज को प्राथमिकता क्यों?
3. भूमि पूजन गोपनीय तरीके से क्यों किया गया, प्रशासन मौन क्यों है?
4. क्या गरीब जनता निजी मेडिकल कॉलेज की महंगी फीस दे पाएगी?
*राजनीतिक हलचल तेज*
“वोट नहीं” आंदोलन की चेतावनी के बाद जिले में सियासी हलचल तेज हो गई है। 2026 में संभावित विधानसभा चुनाव से पहले यह मुद्दा भाजपा के लिए मुसीबत बन सकता है। विपक्ष को भी बैठे-बिठाए मुद्दा मिल गया है।
*बॉक्स:“प्रशासन का पक्ष”*
इस संबंध में कलेक्टर और सीएमएचओ से संपर्क का प्रयास किया गया, लेकिन खबर लिखे जाने तक कोई जवाब नहीं मिला।



