क्राइममध्य प्रदेश

शंकर तालाब कांड में नया खुलासा – ‘शनिवार को खोदो, रविवार को भागो’ | गांव का विभीषण शामिल, हफ्तों से फरार माफिया

माफिया राज - अफसरों की छुट्टी, माफिया की ड्यूटी | शंकर तालाब से आयरन ओर पार, प्रशासन कन्हवारा से बेखबर

कटनी में आस्था छलनी, अफसर बेबस: खनिज-वन-राजस्व विभाग माफिया पर विराम लगाने में फेल | ‘गांव का विभीषण’ दे रहा लोकेशन | कन्हवारा से आज तक मुंह फेरे बैठा प्रशासन

 

*कटनी, 28 मई 2026:* प्राचीन शिव मंदिर के सामने स्थित *धार्मिक शंकर तालाब* को पोकलेन से चीरकर करोड़ों की आयरन ओर लूटने वाले माफिया का *आज दिनांक तक पता नहीं* लगा सका है। *खुलासा: माफिया इतना शातिर है कि अवैध खनन के लिए जानबूझकर शनिवार का दिन चुनता है।* दूसरे दिन रविवार की छुट्टी में अधिकारी-कर्मचारी फोन नहीं उठाते, और माफिया निश्चिंत होकर रातभर खुदाई करता है।

*हफ्ता बीता, प्रशासन के हाथ खाली*

शंकर तालाब कांड को हुए * हफ्ता बीत चुका है। जिंदा तालाब अब गहरे गड्ढे में बदल चुका है। आयरन ओर से भरे सैकड़ों डंपर निकल गए, पर *खनिज, वन और राजस्व विभाग* माफिया का सुराग तक नहीं लगा पाए। स्थिति यह है कि तीनों विभाग *माफिया पर विराम लगाने में खुद को पूरी तरह असमर्थ महसूस कर रहे हैं।*

 

*’शनिवार का खेला’ – माफिया का मास्टरप्लान*  

सूत्र बताते हैं कि माफिया ने *”वीकेंड स्ट्राइक”* का फॉर्मूला बना रखा है। शनिवार शाम को पोकलेन-डंपर कन्हवारा क्षेत्र में पहुंचते हैं। रात 2 बजे खुदाई शुरू। रविवार सुबह तक माल पार। अधिकारी छुट्टी पर, फोन स्विच ऑफ। सोमवार को जब टीम पहुंचती है, तब तक *सिर्फ गड्ढा और सबूत मिटे हुए ट्रैक मिलते हैं।* इसी फॉर्मूले से शंकर तालाब को छलनी किया गया।

 

*कन्हवारा पर मेहरबान क्यों है प्रशासन?*

धार्मिक आस्था का प्रतीक *प्राचीन शिव मंदिर और शंकर तालाब* को माफिया ने तहस-नहस कर दिया, *पर मजाल है कि प्रशासन कन्हवारा की तरफ निगाहे-करम कर ले।* ग्रामीणों का आरोप है कि शिकायतों के बाद भी खनिज निरीक्षक, पटवारी, बीट गार्ड मौके पर नहीं पहुंचे। “मंदिर के सामने तालाब खोद दिया, कल मूर्ति तोड़ देंगे। पर साहब यहां आते ही नहीं,” एक ग्रामीण ने आक्रोश जताया।

 

*’गांव का विभीषण’ शामिल – सूत्र*

सबसे चौंकाने वाला खुलासा यह है कि *इस काले कारोबार में गांव का ही कोई ‘विभीषण’ शामिल है।* उसी की मुखबिरी पर माफिया को तालाब में आयरन ओर होने की पक्की लोकेशन मिली। वही रेकी कर बताता है कि कब कौन सा अधिकारी कहां है। उसी के इशारे पर शनिवार को मशीनें उतरती हैं। *बिना लोकल सपोर्ट के रात में मंदिर के सामने इतना बड़ा कांड मुमकिन नहीं।*

 

*अगर ऐसे ही चलता रहा तो…*

ग्रामीणों की चेतावनी साफ है – *अगर प्रशासन यूं ही सोता रहा तो अगला नंबर दूसरे तालाब या मंदिर की जमीन का है।* शंकर तालाब के बाद माफिया के हौसले सातवें आसमान पर हैं। “आज तालाब गया, कल खेत जाएंगे, परसों घर,” महिलाओं में दहशत है।

 

*विभागों की बेबसी जगजाहिर*

1. *खनिज विभाग:* “स्टाफ कम है, रात में गश्त नहीं कर सकते।”

2. *वन विभाग:* “हमारा क्षेत्र नहीं है।”

3. *राजस्व विभाग:* “पटवारी रिपोर्ट नहीं देता।”

*नतीजा:* माफिया बेखौफ, आस्था शर्मसार।

 

*जनता के सवाल:*

1. शनिवार को ही खनन क्यों? क्या अफसरों की छुट्टी का शेड्यूल माफिया के पास है?  

2. 1 महीने में एक भी गिरफ्तारी क्यों नहीं?

3. ‘गांव का विभीषण‘ कौन? प्रशासन नाम उजागर करे।

4. कन्हवारा में स्थायी चौकी क्यों नहीं?

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