कटनी: रेल प्रशासन की उदासीनता या साजिश? पैनल अस्पताल न बढ़ने से कर्मचारियों को हो रही परेशानी
जबलपुर के बाद कटनी: रेल मेडिकल सिस्टम पर प्रश्नचिन्ह, निष्पक्ष जांच की मांग तेज

देश के प्रमुख रेलवे जंक्शन कटनी में हजारों रेलकर्मियों के लिए नए अस्पतालों के पैनलमेंट में वर्षभर से विलंब की साजिश ?
पैनल विस्तार में एक वर्ष की देरी, पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग तेज, जबलपुर मेडिकल क्लेम प्रकरण के बाद अब कटनी रेलवे की स्वास्थ्य व्यवस्था पर भी प्रश्न -चिन्ह
निष्पक्ष जांच और पारदर्शिता की मांग तेज ‘क्या मोस्ट पावरफुल वी डी शर्मा करेंगे करुणाप्रधान कार्यवाही ?’
( पायल जेतवानी )* कटनी जबलपुर रेल मंडल में कथित मेडिकल क्लेम अनियमितताओं के उजागर होने के बाद अब कटनी रेलवे की स्वास्थ्य सुविधाएं भी चर्चा के केंद्र में हैं। पश्चिम मध्य रेलवे के सबसे व्यस्त रेल जंक्शनों में शामिल कटनी में हजारों रेल कर्मचारी, पेंशनभोगी एवं उनके आश्रित आज भी मुख्यतः एक ही पैनल अस्पताल पर निर्भर हैं। ऐसे में कर्मचारियों के समक्ष उपचार के सीमित विकल्प होने का प्रश्न लगातार उठ रहा है। जानकारी के अनुसार कटनी के कई निजी अस्पतालों ने रेलवे पैनल में शामिल होने के लिए निर्धारित प्रक्रिया के तहत आवेदन एवं आवश्यक दस्तावेज काफी पहले जमा कर दिए थे। इसके बावजूद लगभग एक वर्ष से पैनलमेंट की प्रक्रिया लंबित बताई जा रही है, जिससे कर्मचारियों को गुणवत्तापूर्ण एवं प्रतिस्पर्धी चिकित्सा सुविधाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है। सवाल उठ खड़े हुए हैं कि -यह विलम्ब साजिशन एक ही अस्पताल को मालामाल करने की रेल अफसरों की मिलीभगत का खेल तो नहीं है l कटनी के महाशक्तिशाली सांसद वी डी शर्मा जी और जनसेवा के सर्वकालिक सर्वोत्तम उपासक भाजपा जिलाधिपति दीपक टंडन जी की ओर आज अनगिनत स्थानीय रेलकर्मी टुकुर – टुकुर देख रहे हैं और उनसे मन ही मन प्रार्थना भी कर रहे हैं कि ट्रिपल एंजिन सरकार के ये डबल पॉयलेट सिर्फ और सिर्फ रेल मंडल प्रशासन को खत लिखने की विराटतम कृपा कर देंगे तो उनका चिकित्सिय उद्धार हो जाएगा l*
रेलवे कर्मचारियों को गुणवत्तापूर्ण एवं सुलभ चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना रेलवे प्रशासन का वैधानिक दायित्व माना जाता है। रेलवे की चिकित्सा व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कर्मचारियों और उनके आश्रितों को आवश्यकता पड़ने पर समयबद्ध उपचार मिल सके। यदि किसी बड़े रेल केंद्र पर पर्याप्त पैनल अस्पताल उपलब्ध नहीं हैं अथवा पैनल विस्तार की प्रक्रिया अनावश्यक रूप से लंबित रहती है, तो इससे कर्मचारियों के हित प्रभावित हो सकते हैं।
साथ ही भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 के अंतर्गत गरिमापूर्ण जीवन के अधिकार में स्वास्थ्य सेवाओं तक समुचित पहुंच को भी
*क्या कहते हैं नियम और जनहित ?*
रेलवे कर्मचारियों को गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना रेलवे प्रशासन की वैधानिक जिम्मेदारी है। रेलवे मेडिकल अटेंडेंस नियम, रेलवे बोर्ड द्वारा जारी पैनलमेंट संबंधी दिशा-निर्देश तथा भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन एवं स्वास्थ्य के अधिकार की भावना यही कहती है कि कर्मचारियों को समय पर, सुलभ और गुणवत्तापूर्ण उपचार उपलब्ध कराया जाए।
यदि पात्र अस्पतालों के आवेदन लंबे समय तक बिना निर्णय लंबित रखे जाते हैं, तो इससे कर्मचारियों के उपचार के विकल्प सीमित हो सकते हैं। ऐसी स्थिति में पूरी प्रक्रिया का पारदर्शी, निष्पक्ष और समयबद्ध होना जनहित की अनिवार्य आवश्यकता है।
*जांच में उठ सकते हैं ये महत्वपूर्ण शंकास्पद प्रश्न ?*
रेल मंडल प्रशासन जबलपुर में अस्पताल पैनल का विस्तार लंबित या साजिशन अवरुद्ध रखकर रेलकर्मियों के संवैधानिक अधिकारों का हनन क्यों किया जा रहा है ?
अस्पताल पैनल विस्तार में कटनी जंक्शन में नए अस्पतालों के पैनलमेंट के लिए निर्धारित समय-सीमा का पालन क्यों नहीं किया गया ?
कितने अस्पतालों ने आवेदन किया और कितनों का निरीक्षण हुआ ? निरीक्षण रिपोर्ट किस अधिकारी के पास कब से लंबित है ?
यदि अस्पताल निर्धारित मानकों पर खरे उतरे हैं तो पैनलमेंट आदेश अब तक क्यों जारी नहीं हुए ?
क्या कर्मचारियों के हितों का आकलन करते हुए पर्याप्त अस्पतालों का चयन किया गया ?
क्या इस प्रक्रिया की किसी स्वतंत्र समिति से समीक्षा कराई गई ?
“कटनी जैसा महत्वपूर्ण रेल जंक्शन, जहां हजारों कर्मचारी और उनके परिवार स्वास्थ्य सेवाओं पर निर्भर हैं, वहां चिकित्सा सुविधाओं का विस्तार किसी व्यक्ति या संस्थान का नहीं, बल्कि जनहित का विषय है। यदि पात्र अस्पतालों के आवेदन लंबे समय तक लंबित हैं तो रेलवे प्रशासन को पूरी प्रक्रिया सार्वजनिक करते हुए कारण स्पष्ट करने चाहिए। पारदर्शिता ही किसी भी आशंका का सबसे प्रभावी उत्तर है।



