सिस्टम से लड़ रहे 12 किसान! स्कूल प्रिंसिपल बोले रास्ता नहीं मिलेगा, DEO मौन, एसडीएम ने कहा जांच होगी
DEO का "मौखिक आदेश" बताकर कन्हवारा स्कूल प्रशासन करवा रहा बाउंड्री, DEO सच्चिदानंद पांडे ने फोन नहीं उठाया?

दान में मिली जमीन पर कब्जे की तैयारी: कन्हवारा स्कूल प्रबंधन 50 साल पुराना आम रास्ता बंद करने पर अड़ा, धर्मदास अग्रवाल के दान को भूले, किसान सड़क पर
कटनी/कन्हवारा।* निडर आवाज`शिक्षा के नाम पर किसानों की रोजी-रोटी पर संकट। कटनी जिले के *कन्हवारा* स्थित *सेठ महादेव प्रसाद अग्रवाल उच्चतर माध्यमिक विद्यालय* के प्रिंसिपल पर *50 साल पुराना आम रास्ता बंद* करने का गंभीर आरोप लगा है।
ग्रामीणों का कहना है कि स्कूल की जमीन *शहर के समाजसेवी स्व. धर्मदास अग्रवाल* द्वारा लगभग 50 वर्ष पूर्व दान में दी गई थी। उसी दान की जमीन से गुजरने वाले परंपरागत रास्ते को अब स्कूल प्रशासन बाउंड्री के नाम पर बंद करना चाहता है।
*12 किसानों की खेती पर संकट*
किसानों का आरोप है कि अगर ये रास्ता बंद हो गया तो *एक दर्जन से ज्यादा किसानों की खेती प्रभावित* हो जाएगी। उनके खेतों तक पहुंचने का यही एकमात्र रास्ता है। रास्ता बंद होते ही उनका जीवन-यापन संकट में पड़ जाएगा।
किसानों की मांग है कि *स्कूल प्रबंधन बाउंड्री रास्ता छोड़कर करे* और उन्हें उनकी खेती से वंचित न किया जाए।
*प्रिंसिपल का बयान: “रास्ता नहीं देंगे“*
स्कूल प्रिंसिपल *वीरेंद्र मरकाम* का कहना है:
> _”वो कोई सरकारी रास्ता नहीं है। वो सरकारी नक्शे में दर्ज नहीं है। हमें पूरे जमीन पर बाउंड्री करने के समिति और जिला शिक्षा अधिकारी DEO साहब का मौखिक आदेश है।”_
*एसडीएम का बयान: “शिकायत दर्ज कराएं, जांच होगी”*
इस पूरे मामले पर *एसडीएम कटनी प्रमोद चतुर्वेदी* ने `निडर आवाज` से कहा:
> _“अगर कोई किसान व्यथित है तो तहसील कार्यालय में शिकायत दर्ज कराएं। मामले की जांच की जाएगी।”_
*DEO का पक्ष नहीं मिल सका*
इस संबंध में *जिला शिक्षा अधिकारी सच्चिदानंद पांडे* से संपर्क कर उनका पक्ष जानने के प्रयास किए गए, लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो सका।
*दानदाता परिवार का पक्ष नहीं मिला*
इस पूरे मामले पर जमीन दान करने वाले *सेठ महादेव प्रसाद अग्रवाल* के वंशज *के.के. अग्रवाल* से भी संपर्क नहीं हो सका है।
*निडर आवाज की अपील*
एसडीएम के निर्देश के बाद `निडर आवाज` प्रभावित किसानों से अपील करता है कि वे शीघ्र तहसील कार्यालय में लिखित शिकायत दर्ज कराएं और रास्ते को संरक्षित कराने की मांग करें।




