VD शर्मा के दौरे से पहले खुलासा: बोरा कंपनी के विस्फोट से कांप रहा बिस्तरा, मैनेजर केके चंद्रा मौन
कैमूर पर संकट: 100 मीटर दूर ऐतिहासिक पहाड़ी को निगल रही बोरा कंपनी, सवाल पर HR ने मोबाइल ही बंद कर लिया

बिस्तरा की “बोरा कंपनी” से त्रस्त ग्रामीण, जवाब मांगो तो मैनेजर फोन नहीं उठाते
*कटनी।* बिस्तरा गांव में तीन पीढ़ियों से संचालित मे. एन एम दुबास कंपनी उर्फ “बोरा कंपनी” की मनमानी के खिलाफ ग्रामीणों का गुस्सा अब चरम पर है। निडर आवाज के ग्राउंड रिपोर्ट के बाद जब कंपनी के मैनेजर/HR केके चंद्रा से इस मामले में संपर्क करने की कोशिश की गई, तो महाशय ने कई बार फोन लगाने के बावजूद मोबाइल रिसीव करना तक जरूरी नहीं समझा।
*50 मीटर दूर कैमूर, पर प्रदूषण बेलगाम*

कंपनी परिसर से मात्र 100 मीटर की दूरी पर ऐतिहासिक कैमूर पहाड़ियां हैं। खुली खदान, क्रशर की धूल-धुआं और भीषण विस्फोटों से कैमूर की चट्टानें कट रही हैं और मकानों की भी दुर्दशा है। ग्रामीणों का आरोप है कि विस्फोट की आवाज से जीव-जंतु पलायन कर गए और लोगों को सांस-अस्थमा की बीमारी हो रही है। गेट पर “रुको-देखो-जाओ” लिखा है, लेकिन अंदर पर्यावरण मानकों का उल्लंघन खुलेआम।

*CSR के नाम पर सन्नाटा, सवाल पर सन्नाटा*
ग्रामीणों का कहना है कि कंपनी के CSR मद से आज तक बिस्तरा में कोई ठोस काम नहीं हुआ। जब निडर आवाज ने मैनेजर/HR केके चंद्रा से प्रदूषण, विस्फोट और CSR पर जवाब मांगने के लिए कई बार फोन लगाया, तो उनकी उंगली मोबाइल रिसीव करने तक नहीं पहुंची।
*अधिकारी मौन, सांसद से उम्मीद*
स्थानीय लोग बताते हैं कि मीडिया ने पहले भी इस मुद्दे को उठाया, लेकिन जिला प्रशासन और प्रदूषण बोर्ड ने आंख मूंद रखी है। अब बिस्तरा के लोग खजुराहो सांसद VD शर्मा से उम्मीद लगाए बैठे हैं जो कल कैमोर क्षेत्र के दौरे पर आ रहे हैं। ग्रामीणों की मांग है – बोरा कंपनी पर कड़ा रुख अपनाकर कैमूर पहाड़ियों और गांव को बचाया जाए।
*कंपनी का पक्ष:* खबर प्रकाशन तक मैनेजर/HR के के चंद्रा से संपर्क नहीं हो सका। बार बार फोन लगाने पर भी उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया, उनका पक्ष आने पर उसे प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।

*नोट:* यह रिपोर्ट निडर आवाज की टीम के मौके के निरीक्षण, ग्रामीणों के बयान और कंपनी प्रबंधन से संपर्क के प्रयास पर आधारित है। लाइसेंस/NOC की स्थिति की पुष्टि जिला प्रशासन/खनिज/PCB की जांच रिपोर्ट के बाद होगी।




