कलेक्टर के पास शिकायत, विभाग में तमाशा: अमाड़ी में कानून नहीं “खानदान” चलता है
विरासत में मिली दुकान, विरासत में मिली नौकरी: सहकारिता बनी "पारिवारिक प्रॉपर्टी"

“विरासत में नौकरी” पर कलेक्टर से शिकायत: निडर आवाज के खुलासे के बाद सहकारिता में फर्जी जांच अधिकारी का खेल, SCI में “राहुल” नाम का कोई है ही नहीं
*कटनी* : _निडर आवाज_ के खुलासे के बाद *Shop 204 के बेनामी संचालन* और *अमाड़ी-कांटी सहकारी समिति में विरासत भर्ती* का मामला अब कलेक्टर तक पहुंच गया है। कलेक्टर कार्यालय में 28/07/2026 को *आवेदक महेंद्र सोनी* द्वारा दिया गया लिखित आवेदन क्रमांक *3829* सामने आया है।

*आवेदन में लगे गंभीर आरोप*
आवेदन में कहा गया है कि *अमाड़ी-कांटी समिति के अंतर्गत शासकीय उचित मूल्य दुकान* में नियमों को ताक पर रखकर *बैकडोर एंट्री* दी गई है।
*शिकायत के मुख्य बिंदु:*
1. *विरासत वाली नियुक्ति* : पहले विक्रेता के स्थान पर उसके पुत्र को बिना किसी प्रक्रिया के विक्रेता बना दिया गया।
2. *बिना विज्ञापन गुप्त भर्ती* : न अखबार में विज्ञापन, न ऑनलाइन आवेदन। सीधे गुप्त तरीके से भर्ती कर दी गई।
3. *नियमों का उल्लंघन* : MP शासन के नियम अनुसार चयन समिति और विज्ञापन अनिवार्य है, उसकी खुलेआम धज्जियां उड़ाई गईं।
4. *जनता से धोखा* : योग्य अभ्यर्थियों को मौका न देकर सिर्फ “पहुंच” वाले को लाभ दिया गया।

आवेदक ने *उच्च स्तरीय जांच, नियुक्ति निरस्त कर पुनः पारदर्शी प्रक्रिया, और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई* की मांग 15 दिन में की है।
*जांच के नाम पर गुमराह कर रहा विभाग?*
*सीनियर को-ऑपरेटिव इंस्पेक्टर शैलेश सिंह* ने बताया था कि मामले की जांच *SCI अधिकारी गीतेश मेहरा और राहुल* कर रहे हैं। लेकिन _निडर आवाज_ की पड़ताल में बड़ा खुलासा हुआ।
*सहकारिता विभाग के सूत्रों के अनुसार SCI में “राहुल” नाम का कोई अधिकारी ही नहीं है।*
जब *वरिष्ठ निरीक्षक गीतेश मेहरा* से पूछा गया तो उन्होंने भी पल्ला झाड़ लिया – _”मेरे पास कांटी अमाड़ी की फाइल नहीं है। मुझे बड़वारा के 3 विक्रेताओं की जांच मिली है।”_
*सहायक आयुक्त भी मौन*

शुक्रवार तक रिपोर्ट देने की बात कहने वाले *सहायक आयुक्त राजयश कुरील* से संपर्क नहीं हो सका।
*सवाल:* अगर जांच हो ही नहीं रही तो शैलेश सिंह “राहुल” का नाम क्यों ले रहे हैं? क्या मामले को दबाने की साजिश है?




