कटनी के कन्हवारा में दोहरा इंसाफ? रसूखदारों के कब्जे पर चुप्पी, गरीब दलितों पर नोटिस की मार!
प्रशासन पर दोहरे मापदंड का आरोप: 29 एकड़ तालाब पर कब्जा यथावत, 20 साल से बसे गरीब दलितों को बेदखली नोटिस

कटनी के कन्हवारा में प्रशासन का दोहरा मापदंड? 29 एकड़ तालाब पर कब्जे पर कार्रवाई नहीं, गरीब दलितों को बेदखली नोटिस
कटनी / कन्हवारा (निडर आवाज़ संवाददाता) कटनी जिले के कन्हवारा गांव से प्रशासन की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवाल खड़ा हो रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि एक ही तरह के दो मामलों में प्रशासन दो अलग-अलग तरह से कार्रवाई कर रहा है।
मामला 1: 29 एकड़ तालाब पर कब्जे का आरोप
ग्रामीण अशोक पाटकर ने विगत दिनों जन समस्या निवारण शिविर में शिकायती आवेदन दिया था। आवेदन के अनुसार कन्हवारा के छ: घरा स्थित लगभग 29 एकड़ के तालाब में कथित अवैध कब्जा है और वहां खेती, ईंट भट्ठा और व्यवसायिक उपयोग किया जा रहा है। शिकायतकर्ता का कहना है कि शिकायत को 15 दिन से अधिक हो गए हैं, लेकिन मौके पर कोई ठोस कार्रवाई नजर नहीं आई है।
मामला 2: शंकर तालाब की मेड़ पर रह रहे गरीबों को नोटिस
वहीं दूसरी ओर, कन्हवारा के ही शंकर तालाब की मेड़ पर विगत 20 वर्षों से अधिक समय से रह रहे लगभग एक दर्जन दलित, पिछड़े और आदिवासी परिवारों को बेदखली का नोटिस प्राप्त हुआ है।
सफाईकर्मी संजय मोगरे ने निडर आवाज़ को बताया, _“हम लोग 20 साल से ज्यादा समय से गांव के किनारे झोपड़ी बनाकर रह रहे हैं। हम दलित हैं, इसलिए पहले से ही गांव के बाहर बसाया गया था। हम गांव की सेवा करते हैं और बहुत गरीब हैं। अब लगातार नोटिस मिल रहे हैं। प्रशासन से अनुरोध है कि हमें यहां से न हटाया जाए।”_
इसी तरह पुरुषोत्तम बर्मन और लोचन यादव ने बताया कि इस समस्या के समाधान के लिए वे पूरे परिवार के साथ क्षेत्रीय विधायक श्री संदीप जायसवाल जी के पास भी गए थे। ग्रामीणों के अनुसार विधायक जी ने उन्हें न्याय दिलाने का आश्वासन दिया है और कटनी से वापस लौटने के लिए किराए की मदद भी की है।
सवाल जो जवाब मांगते हैं:
– 29 एकड़ तालाब के मामले में 15 दिन बाद भी कार्रवाई क्यों नहीं?
– शंकर तालाब की मेड़ पर 20 साल से रह रहे गरीब परिवारों को ही क्यों नोटिस?
– क्या गरीबों के लिए अलग और रसूखदारों के लिए अलग नियम है?
निडर आवाज़ ने इस संबंध में संबंधित राजस्व अधिकारियों से संपर्क करने का प्रयास किया, उनका पक्ष प्राप्त नहीं हो सका है। पक्ष आने पर उसे प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।
*नोट:* ये सभी आरोप ग्रामीणों और शिकायतकर्ता के कथन पर आधारित हैं। निडर आवाज़ किसी पर सीधा आरोप नहीं लगाता, जांच प्रशासन को करनी है।



