‘खबरें छपीं, वीडियो बने, पर फाइल कलेक्टर तक नहीं पहुंची: कटनी में खनिज-राजस्व-वन विभाग की मिलीभगत?’
राष्ट्रीय सम्मान या स्थानीय शर्म? कटनी में हादसा हुआ, प्रदूषण है... पर जवाब देगा कौन?'

DMO नॉट रिचेबल, इंस्पेक्टर बोले ‘असक्षम’… बिस्तरा गांव बोला ‘प्रदूषण से जीना मुश्किल’… और 3 विभाग अब भी खामोश!
*कटनी। निडर आवाज ब्यूरो।*
कटनी जिले में एक तरफ राष्ट्रीय स्तर का सम्मान बंट रहा है, दूसरी तरफ स्थानीय स्तर पर जान और सांस दोनों दांव पर लगी है। एक ओर DGMS अवार्डी कंपनी पर बिस्तरा गांव का प्रदूषण का गंभीर आरोप। दूसरी ओर खदान हादसे के बाद जिम्मेदार विभागों का ‘गायब’ हो जाना।*
और सबसे शर्मनाक बात ये कि *खनिज, राजस्व और वन विभाग तीनों ने चुप्पी साध रखी है।* खबरें छप रही हैं, वीडियो वायरल हो रहे हैं, पर मामला कलेक्टर तक पहुंच ही नहीं रहा। आखिर क्यों?
घटना 1: ‘सम्मान’ के पीछे छिपा ‘जहर’ – बिस्तरा गांव त्रस्त
DGMS अवार्डी केके चंद्रा की कंपनी को खन सुरक्षा और पर्यावरण के क्षेत्र में राष्ट्रीय सम्मान मिला है। कंपनी और विभाग दोनों ने इसे ‘कटनी का गौरव’ बताया। लेकिन इसी कंपनी के प्लांट से सटे बिस्तरा गांव के ग्रामीणों की कहानी बिल्कुल अलग है।*
ग्रामीणों का आरोप है:
1. *हवा में जहर:* 24 घंटे धुआं और डस्ट उड़ती है। सांस और त्वचा की बीमारी आम हो गई है।
2. *पानी खराब:* केमिकल वेस्ट से नाले और बोर का पानी पीने लायक नहीं बचा।
3. *फसल बर्बाद:* खेतों में धूल की परत जमने से उपज आधी रह गई।
*ग्रामीणों का सीधा सवाल:* “सरकार अवार्ड दे रही है, पर हमें जीने का हक कब देगी?”

*घटना 2: ‘जवाबदेही’ के पीछे ‘नॉट रिचेबल’ – जमुआनी कलां खदान हादसे पर सिस्टम फेल*
इसी सप्ताह जिले की एक खदान में बड़े हादसे का खुलासा हुआ है। हादसे के बाद जो हुआ वो सिस्टम की नाकामी की मिसाल है।
*1. DMO कटनी:* फोन लगातार ‘नॉट रिचेबल’। जिम्मेदार अधिकारी से संपर्क ही नहीं हो पाया।
*2. माइनिंग इंस्पेक्टर:* कैमरे पर कहा “इस मामले में हम सक्षम नहीं हैं।” मतलब जांच कौन करेगा?
इतने बड़े हादसे में सिस्टम ने हाथ खड़े कर दिए।
परखच्चे उड़ी पोकलेन की खदान के गैरिज में रिपेयरिंग होता हुआ वीडियो
सबसे बड़ा धमाका: 3 विभाग ‘साइलेंट’, फाइल कलेक्टर तक नहीं
इन दोनों गंभीर मामलों में *खनिज विभाग, राजस्व विभाग और वन विभाग* की भूमिका सबसे संदिग्ध है।
*क्यों? क्योंकि तीनों विभाग पूरी तरह चुप हैं।*
1. *खनिज विभाग:* जिसकी जिम्मेदारी सेफ्टी और लीज की है, वो ‘असक्षम’ बोलकर बच रहा है।
2. *राजस्व विभाग:* मुआवजा और जमीन का मामला इनके पास। कोई जांच नहीं सिर्फ आश्वासन,फाइल आगे ही नहीं बढ़ रही।
3. *वन विभाग:* प्रदूषण और वन भूमि से सटी खदानों का मुद्दा इनका। कोई बयान तक नहीं।

सूत्रों के मुताबिक दोनों मामले अभी तक कलेक्टर के टेबल तक नहीं पहुंचे हैं।
खबरें बनती हैं, प्रकाशित होती हैं, सोशल मीडिया पर हंगामा होता है… लेकिन प्रशासनिक स्तर पर फाइल को रास्ते में ही रोक दिया जाता है।
*सवाल उठता है: क्या ये चुप्पी संयोग है या सोची-समझी साजिश?*
*विशेषज्ञ और आमजन क्या कह रहे हैं?*
स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि *”राष्ट्रीय सम्मान की आड़ में स्थानीय समस्याओं को दबाया जा रहा है।”*
एक वरिष्ठ अधिवक्ता ने कहा, *”जब DMO ही नॉट रिचेबल हो और इंस्पेक्टर खुद को असक्षम बताए तो ये सीधे-सीधे कर्तव्यहीनता है। इस पर 166 IPC के तहत FIR होनी चाहिए।”*

बिस्तरा की एक स्थानीय निवासी ने कहा, *”हमें अवार्ड नहीं, साफ पानी और साफ हवा चाहिए।”*
*निडर आवाज की 5 सूत्रीय मांग*
1. *त्काल कार्रवाई:* DMO को 24 घंटे में जवाब तलब कर निलंबन की कार्रवाई की जाए।
2. *कलेक्टर की मॉनिटरिंग:* कलेक्टर स्वयं दोनों मामलों की जांच कर संयुक्त टीम गठित करें।
3. *FIR और मुआवजा:* हादसे में लापरवाही पर कंपनी और अधिकारियों पर आपराधिक प्रकरण दर्ज किया जाए।
4. *स्वतंत्र जांच:* MPCB और किसी तृतीय पक्ष से बिस्तरा गांव की हवा, पानी और मिट्टी का परीक्षण हो। रिपोर्ट सार्वजनिक हो।
5. *उत्पादन पर रोक:* जांच पूरी होने तक प्रदूषण फैला रही इकाई का उत्पादन तत्काल बंद किया जाए।

*निष्कर्ष: कटनी को खनिज नहीं, न्याय चाहिए*
*एक तरफ ट्रॉफी और ताली। दूसरी तरफ प्रदूषण , डर,और आंसू।*
*एक तरफ ‘राष्ट्रीय सम्मान’ का जश्न। दूसरी तरफ ‘स्थानीय चीख’ की अनसुनी।*
जब तक खनिज, राजस्व और वन विभाग की चुप्पी नहीं टूटेगी और फाइल कलेक्टर तक नहीं पहुंचेगी, तब तक कटनी में खन के नाम पर सिर्फ ‘खिलवाड़’ होता रहेगा।

*अब गेंद कलेक्टर महोदय के पाले में है। देखना है वो ‘नॉट रिचेबल’ सिस्टम को ‘रिस्पॉन्सिबल‘ बनाते हैं या नहीं।*
*रिपोर्ट: महेंद्र सोनी, निडर आवाज, कटनी*
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