मंदिर-मस्जिद पर राजनीति, और यहां भगवान कचरे में! कटनी में लावारिस पड़ी गुप्तकालीन विष्णु प्रतिमा
"जगत के पालनहार खुद तरस रहे पालन को" - गुप्तकालीन विष्णु प्रतिमा सड़क किनारे पड़ी, प्रशासन मौन

शेषशैया पर विराजमान अद्भुत मूर्ति में नाभि से कमल पर ब्रह्मा विराजमान, पुरातत्व विभाग और जिला प्रशासन से गुहार बेअसर
*कटनी।* `निडर आवाज`एक ओर आज राजनीति में जगह-जगह हिंदू मूर्तियां खोजी और बताई जा रही हैं। धर्मस्थलों को लेकर न्यायालयों में प्रकरण चल रहे हैं। वहीं दूसरी ओर *सैकड़ों साल पुरानी कलात्मक और महत्वपूर्ण हिंदू मूर्तियां कचरे की तरह लावारिस पड़ी हैं*।
कटनी में *गुप्त शैली की भगवान विष्णु की अद्भुत प्रतिमा* आज खुले में सड़क किनारे पड़ी अपने भाग्य को रो रही है।
*शेषशैया पर विश्राम रत विष्णु*
तस्वीर में स्पष्ट दिख रहा है कि *भगवान विष्णु शेषशैया पर विश्राम रत* हैं। उनकी *नाभि से निकले कमल पुष्प पर ब्रह्मा जी आसीन* हैं। ये गुप्तकालीन कला का बेजोड़ नमूना है। जिसे कभी किसी राजा या सामंत द्वारा भव्य मंदिर में स्थापित कराया गया होगा।
लेकिन आज ये अनमोल धरोहर *धूल, कचरे और झाड़ियों के बीच असुरक्षित* पड़ी है। मूर्ति पर सीमेंट का पलस्तर भी लगा दिख रहा है।
*हर बार गुहार, हर बार अनसुनी*
स्थानीय लोगों ने कई बार *पुरातत्व विभाग और जिला प्रशासन* से मांग की कि इस तरह खुले में बिखरी प्रतिमाओं को संग्रहित कर *जागृति पार्क या चितरंजन शैल वन* जैसे स्थल में रखवा दिया जाए। ताकि प्रतिमाएं सुरक्षित हों और उन स्थलों का आकर्षण मुफ्त में बढ़े।
लेकिन हर बार की आवाज *”नक्कारखाने में तूती“* बनकर रह जाती है।
*चरित्र का दोहरापन*
`निडर आवाज` का सवाल है कि जब एक तरफ मूर्तियों को लेकर राजनीति हो रही है, तो दूसरी तरफ सैकड़ों स्थलों पर हिंदू धर्म से संबंधित कलात्मक मूर्तियां लावारिस क्यों पड़ी हैं? *सुरक्षा और सम्मान के प्रति किसी को मतलब नहीं*।
*निडर आवाज की मांग*
`निडर आवाज` पुरातत्व विभाग और जिला प्रशासन से मांग करता है कि इस *गुप्तकालीन विष्णु प्रतिमा को तुरंत संरक्षित* कर संग्रहालय या किसी सुरक्षित स्थान पर स्थापित किया जाए। अन्यथा हमारी आने वाली पीढ़ियां हमें माफ नहीं करेंगी।
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