किसके इशारे पर चल रहा अवैध क्लीनिक? दूसरी बार पकड़ने के बाद भी नहीं हुई गिरफ्तारी
रंगे हाथ पकड़ा तो FIR क्यों नहीं? DIO के सामने भी बच गया झोलाछाप डॉक्टर

DIO की गाड़ी मौके पर, जांच के फोटो वायरल… लेकिन FIR नहीं। दूसरी बार पकड़ा गया डॉक्टर, सूत्र: फिर शुरू कर दिया अवैध क्लीनिक
*कटनी। निडर आवाज ब्यूरो।* कटनी में स्वास्थ्य विभाग की कार्यवाही पर सवालों का अंबार लग गया है। *”तथाकथित डॉक्टर को छोड़ो, दुकान बंद करो“* – यही फॉर्मूला यहां चल रहा है।
मौके की तस्वीरें चीख-चीख कर सच बता रही हैं
1. *पहली फोटो*: मित्रा फार्मेसी के अंदर सीएमएचओ टीम जांच करती दिख रही है। टेबल पर दवाइयां, रजिस्टर और टीम के सदस्य मौजूद।

2. *दूसरी फोटो*: बाहर “मित्रा फार्मेसी” का बोर्ड और DIO की सरकारी गाड़ी MP21ZB2252 खड़ी है। मतलब छापा पुख्ता था। लेकिन इसके बाद हुआ क्या?

कार्यवाही का मजाक: स्टोर 7 दिन सीज, डॉक्टर फ्री
स्वास्थ्य विभाग ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर बताया कि मेडिकल स्टोर 7 दिन के लिए सीज किया गया। लेकिन *रंगे हाथों पकड़े गए झोलाछाप डॉक्टर* पर एक लाइन नहीं। *न FIR, न गिरफ्तारी, न लाइसेंस रद्द। सीधा क्लीन चिट।
ये दूसरी बार है – फिर भी सबक नहीं
सूत्रों के अनुसार ये पहली बार नहीं है। *पहले भी सीएमएचओ टीम क्लीनिक को सीज कर चुकी है। लेकिन हर बार कुछ दिन बाद वो फिर से “लुक-छिपकर” मरीजों की जान से खिलवाड़ शुरू कर देता है।
सबसे बड़ा सवाल: किसके इशारे पर?
1. रंगे हाथ पकड़ा तो FIR क्यों नहीं?* BNS 314 और MP नर्सिंग होम एक्ट के तहत केस क्यों नहीं बना?
2. 7 दिन का सीज किस काम का? ये सजा है या “छुट्टी“? 8वें दिन फिर धंधा शुरू।
3. *राजनीतिक संरक्षण? बार-बार पकड़े जाने के बाद भी कार्रवाई न होना सीधा इशारा करता है कि किसी का हाथ ऊपर है।
सूत्रों का ताजा दावा सूत्रों का कहना है कि *”7 दिन पूरे होते ही उक्त ने फिर से अपना अवैध क्लीनिक शुरू कर दिया है।”* मरीज अब भी उसके चंगुल में फंस रहे हैं।
निडर आवाज की मांग
1. त्काल FIR: तथाकथित डॉक्टर और संचालक दोनों पर आपराधिक प्रकरण दर्ज हो।
2. स्थाई सील: मेडिकल स्टोर + क्लीनिक दोनों को हमेशा के लिए सीज किया जाए।
3. उच्च स्तरीय जांच: किस अधिकारी ने डॉक्टर को बचाया, इसकी जांच हो।
निष्कर्ष: फोटो में जांच, प्रेस में ढिंढोरा… और जमीनी हकीकत में जीरो। कटनी में झोलाछाप डॉक्टरों का कारोबार इसलिए चल रहा है क्योंकि विभाग “दिखावे की कार्यवाही” कर असली आरोपी को बचा लेता है।
अब गेंद कलेक्टर और स्वास्थ्य मंत्री के पाले में है। क्या वो मरीजों की जान बचाएंगे या फिर से “जांच” के नाम पर लीपापोती होगी?




