सुशासन’ को ठेंगा दिखा रहा कटनी प्रशासन: मीडिया की ख़बरों से भी बेअसर हुए अफ़सर, शराब माफिया को खुला संरक्षण !
कटनी में सीएम हेल्पलाइन बनी मजाक: अफसरशाही के आगे बेबस सरकार, बिना जांच शराब माफिया की शिकायतें की जा रही हैं 'फोर्स क्लोज'

क्या मुख्यमंत्री को भी गुमराह कर रहा कटनी प्रशासन? ग्रामीण करते रहे अवैध शराब का विरोध, अफसर फाइलों में दिखा रहे ‘सुशासन’
कटनी (मध्य प्रदेश)। राज्य सरकार के ‘सुशासन’ के दावों को कटनी जिले का प्रशासनिक अमला सरेआम ठेंगा दिखा रहा है। जिले में सक्रिय शराब माफिया को प्रशासन और आबकारी विभाग का ऐसा खुला संरक्षण प्राप्त है कि मीडिया में लगातार आ रही खबरों का भी अफसरों पर कोई असर नहीं हो रहा है। रसूखदारों के आगे नतमस्तक हो चुका तंत्र आंखें मूंदकर बैठा है, जिससे सरकार की साख पर बट्टा लग रहा है।
कन्हवारा से खमतरा तक माफिया का साम्राज्य
जिले के कन्हवारा, खमतरा, पिपरहता और पिलोजी जैसे ग्रामीण इलाकों में मुख्य सड़कों से लेकर गांवों के भीतर तक अवैध शराब की दुकानें सज रही हैं। आलम यह है कि हर दो किलोमीटर के फासले पर अवैध शराब की ‘पैकारी’ (अवैध काउंटर) बेखौफ होकर संचालित हो रही हैं। मीडिया द्वारा लगातार इन क्षेत्रों की जमीनी हकीकत उजागर किए जाने के बाद भी आबकारी विभाग और जिम्मेदार जन गहरी नींद में सोए हुए हैं।
सीएम हेल्पलाइन का उड़ाया जा रहा मज़ाक,अफसरशाही हावी
इस पूरे मामले में सबसे चौंकाने वाला पहलू जिला प्रशासन की बेलगाम अफसरशाही है। आम जनता की समस्याओं के तुरंत निवारण के लिए बनाई गई मुख्यमंत्री हेल्पलाइन (CM Helpline) को कटनी के अधिकारियों ने मज़ाक बना कर रख दिया है। जब त्रस्त ग्रामीण अवैध शराब की शिकायत इस हेल्पलाइन पर दर्ज कराते हैं, तो धरातल पर कार्रवाई करने के बजाय अफसरशाही अपने रसूख का इस्तेमाल कर उन शिकायतों को ‘फोर्स क्लोज’ (जबरन बंद) कर देती है। बिना किसी जांच या समाधान के शिकायतों को बंद करना यह साफ दर्शाता है कि प्रशासन माफिया के हितों की रक्षा में लगा है।
विरोध करने पर मारपीट, और सिर्फ कागजी कार्रवाई
अवैध शराब के इस बढ़ते जाल से तंग आकर जब ग्रामीण जन इसका पुरजोर विरोध करते हैं, तो बेखौफ शराब माफिया उनके साथ मारपीट करने से भी गुरेज नहीं करता। ग्रामीणों को डराने और उनकी आवाज दबाने के लिए खुलेआम गुंडागर्दी की जा रही है। पीड़ित जब इस बात की शिकायत लेकर पुलिस के पास पहुंचते हैं, तो थाना स्तर पर दबाव के कारण रिपोर्ट तो लिख ली जाती है, लेकिन रसूखदार माफिया के खिलाफ कोई वास्तविक या दंडात्मक कार्रवाई नहीं होती। पुलिस की यह शिथिलता माफिया के हौसले और बुलंद कर रही है।
नियमों की उड़ी धज्जियां, ग्रामीणों में भारी आक्रोश
नियमों के मुताबिक निर्धारित दुकानों के अलावा कहीं भी शराब की बिक्री पूरी तरह गैर-कानूनी है। इसके बावजूद किराना दुकानों, ढाबों और टपरियों से खुलेआम मौत का यह सामान परोसा जा रहा है। इस बेलगाम अवैध कारोबार के चलते ग्रामीण अंचलों में अपराध बढ़ रहे हैं और युवाओं का भविष्य दांव पर लगा है। स्थानीय जनता का कहना है कि यदि मुख्यमंत्री की प्राथमिकताओं में शामिल हेल्पलाइन और मीडिया के खुलासों के बाद भी जिला प्रशासन मौन है, तो यह ‘सुशासन’ नहीं बल्कि सीधे तौर पर ‘माफियाराज’ को बढ़ावा देना है।




