मिशन चौक पर कानून तार-तार: नाक के नीचे थाना और स्कूल, फिर भी खुले में मांस बिक्री पर प्रशासन मौन
मासूम बच्चों की सेहत से खिलवाड़! मिशन स्कूल और पेट्रोल पंप के पास खुले में मांस बिक्री से लोग बेहाल

मिशन चौक पर खुलेआम मांस बिक्री: स्कूल, थाना और पेट्रोल पंप के पास नियमों की धज्जियां, प्रशासन के सारे आश्वासन निकले खोखले
कटनी। शहर के सबसे व्यस्तम और संवेदनशील चौराहे, मिशन चौक पर खुलेआम अंडा, मुर्गा और बकरे के मांस की बिक्री का मामला अब प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। यह पूरा अवैध कारोबार किसी सुनसान इलाके में नहीं, बल्कि शहर की नाक के नीचे चल रहा है। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि इस चौराहे पर यातायात थाने की चौकी, पेट्रोल पंप, लॉज, मेडिकल स्टोर और बच्चों का मिशन स्कूल भी स्थित है। इसके बावजूद जिम्मेदार अधिकारी इस पर पर्दा डाले बैठे हैं।

स्कूल के बच्चों और राहगीरों पर बुरा असर
मिशन स्कूल के ठीक पास और इतने व्यस्त चौराहे पर मांस दुकानों से निकलने वाली भारी दुर्गंध ने स्थानीय लोगों का जीना मुहाल कर दिया है। स्कूल आने-जाने वाले मासूम बच्चों के स्वास्थ्य और उनकी मानसिक स्थिति पर इसका बेहद बुरा असर पड़ रहा है। पेट्रोल पंप, लॉज और मेडिकल स्टोर जैसी जरूरी जगहों पर आने वाले लोग भी इस गंदगी और बदबू से परेशान हैं। यातायात पुलिस चौकी के ठीक सामने कानून का यह उल्लंघन बताता है कि दुकानदारों में व्यवस्था का कोई डर नहीं रह गया है।
अफसरों के आश्वासन निकले खोखले
स्थानीय नागरिकों और सजग मीडिया द्वारा लगातार आवाज उठाने के बाद भी इस दिशा में कार्रवाई शून्य रही है। पूर्व में इस गंभीर मुद्दे को लेकर जब नगर निगम कमिश्नर के स्टेनो से बात की गई थी, तो उन्होंने मामला ‘मैडम के संज्ञान में लाने’ की बात कहकर टाल दिया था। वहीं, एसडीएम साहब ने भी मामले को गंभीरता से लेते हुए जल्द से जल्द उचित कार्रवाई के लिए निगम प्रशासन को निर्देशित करने कहा था। लंबे समय के बाद भी धरातल पर स्थिति जस की तस बनी हुई है, जिससे अफसरों के सारे आश्वासन खोखले साबित हो रहे हैं।

जनप्रतिनिधि मौन, जनता में भारी आक्रोश
शासन और न्यायालय के स्पष्ट निर्देश हैं कि शैक्षणिक संस्थानों, धार्मिक स्थलों और मुख्य चौराहों पर खुले में मांस की बिक्री पूरी तरह प्रतिबंधित होनी चाहिए। इसके बावजूद मिशन चौक पर बिना किसी रोक-टोक के नियमों को ठेंगा दिखाया जा रहा है। नगर निगम की टीम से लेकर क्षेत्र के जिम्मेदार जनप्रतिनिधियों ने इस अव्यवस्था पर पूरी तरह चुप्पी साध रखी है।
अब स्थानीय जनता और प्रबुद्ध नागरिक यह सवाल उठा रहे हैं कि आखिर प्रशासन किस दबाव के चलते कार्रवाई का साहस नहीं जुटा पा रहा है? क्या शहर की कानून व्यवस्था और जनता की सेहत से ज्यादा अहम इन अवैध दुकानों को संरक्षण देना है?

नागरिकों ने एक बार फिर जिला प्रशासन से मांग की है कि वादों के जाल से निकलकर इन दुकानों को तत्काल प्रभाव से किसी अन्य निर्धारित स्थान पर शिफ्ट किया जाए।




