कटनी में अजब साठगांठ: खदान में हुआ बड़ा लैंडस्लाइड, मीडिया ने खोला मोर्चा पर जिला प्रशासन ने मूंद रखी हैं आँखें!
अवैध खनन का खेल या खूनी लापरवाही? जमुआनी में पोकलेन-हाइवा दफन केस को ठंडे बस्ते में डालने की खुली साजिश!

प्रशासन-माफिया की “जुगलबंदी” में दफन हुआ जमुआनी का सच? खदान हादसे के वीडियो ने खोली पोल, फिर भी मौन है सिस्टम!*
कटनी (कैमोर)। कैमोर थाना क्षेत्र के ग्राम पंचायत जमुआनी कलां से एक ऐसा सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसने खनिज माफिया और स्थानीय प्रशासनिक तंत्र की साठगांठ को पूरी तरह बेनकाब कर दिया है। जमुआनी कलां स्थित एक खदान में उत्खनन के दौरान हुए भीषण *भूस्खलन (लैंडस्लाइड)* में *पोकलेन मशीन और हाइवा डंपर जिंदा* दफन हो गए। चौंकाने वाली बात यह है कि इस गंभीर हादसे को खदान संचालक और स्थानीय प्रशासन ने मिलकर कथित तौर पर पूरी तरह दबा दिया।

🎥 *सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल: ऐसे फूटा “पाप का घड़ा”*
सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, यह खौफनाक हादसा करीब दो महीने पहले हुआ था। खदान संचालक ने अपनी रसूख और ताकत के बल पर इस दुर्घटना को पूरी दुनिया से छिपाए रखा। लेकिन कहते हैं कि जुर्म के पैर नहीं होते। पिछले हफ्ते हादसे का एक लाइव वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया, जिसमें धसकती मिट्टी के बीच पोकलेन और हाइवा समाते नजर आ रहे हैं। मीडिया ने जब इस वीडियो के आधार पर मामले को उजागर किया, तब जाकर इस महा-घोटाले का खुलासा हुआ।
🤫 *संचालक मुकरा, लेकिन कोटवार और पटवारी ने माना सच!*
हादसे का वीडियो सामने आने के बाद भी खदान संचालक बेशर्मी से साफ मुकर रहा है। उसका दावा है कि उसकी खदान में ऐसा कोई हादसा हुआ ही नहीं। लेकिन संचालक के झूठ की हवा तब निकल गई जब ग्राम कोटवार और हल्के के पटवारी ने मौके पर ऐसी घटना होने की बात को स्वीकार किया। अब सबसे बड़ा रहस्य यह है कि जब निचले स्तर के सरकारी कर्मचारियों (पटवारी और कोटवार) को इस हादसे की जानकारी थी, तो उन्होंने इसकी रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को क्यों नहीं भेजी?

🔍 *तीन बड़े अनुत्तरित सवाल: जो सीधे मिलीभगत की ओर इशारा करते हैं*
क्या मलबे के नीचे दफन हो गई *इंसानी जिंदगी* ? खदान संचालक इस हादसे को आखिर क्यों छिपा रहा था? सबसे बड़ा डर और आशंका यह है कि जब पोकलेन और हाइवा मलबे में दबे, तो क्या उनके ऑपरेटर्स और मजदूर भी जिंदा दफन हो गए? क्या किसी की मौत को छिपाने के लिए यह पूरा खेल रचा गया?
*क्या अवैध क्षेत्र में चल रहा था मौत का खनन?
आशंका जताई जा रही है कि खदान संचालक स्वीकृत सीमा से बाहर जाकर या बिना वैध अनुमति के खतरनाक तरीके से उत्खनन करवा रहा था। अपनी इस अवैध करतूत को पकड़े जाने के डर से उसने करोड़ों की मशीनों के दफन होने पर भी चुप्पी साधे रखना बेहतर समझा।
*पटवारी की रहस्यमयी चुप्पी के पीछे कौन?*
पटवारी ने घटना की पुष्टि तो की, लेकिन तहसीलदार, जिला खनिज अधिकारी या खनिज इंस्पेक्टर को इसकी लिखित सूचना नहीं दी। सवाल उठता है कि पटवारी ने यह जानकारी किसके दबाव में या किस ” *मोटे फायदे* ” के लिए दबाए रखी? क्या ऊपर से लेकर नीचे तक रिश्वत का खेल चल रहा है?
🛑 *मीडिया रिपोर्ट्स को ठेंगे पर रख रहा प्रशासन*
हैरानी की बात यह है कि सोशल मीडिया पर पुख्ता वीडियो और मीडिया में लगातार खबरें आने के बावजूद कटनी का जिला प्रशासन और खनिज विभाग गहरी नींद में सोया हुआ है। जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा मीडिया रिपोर्ट्स को कोई तवज्जो न देना यह साबित करता है कि सफेदपोशों और खाकी-खादी के संरक्षण में इस पूरे मामले को हमेशा के लिए ” *ठंडे बस्ते में दफन* ” करने की तैयारी कर ली गई है।जनता अब मांग कर रही है कि इस मामले की उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच हो, खदान क्षेत्र की पैमाइश कराई जाए और दोषी पटवारी सहित खदान संचालक पर तत्काल एफआईआर दर्ज की जाए।




