गांव-गांव में स्कूल बंद, गली-गली में दारू! तुम्हारा बच्चा 5 KM पैदल जाएगा, तुम्हारा पति 500 मीटर में ठेका पाएगा
MP में शिक्षा का एनकाउंटर! 99 हजार से घटकर 92 हजार रह गए स्कूल, आबकारी विभाग का टारगेट 15% बढ़ा

सवाल जो कोई नहीं पूछ रहा: जब 10 बच्चे न होने पर स्कूल बंद, तो 10 ग्राहक न होने पर ठेका क्यों नहीं बंद?
मध्यप्रदेश बना स्कूल बंद करने में नंबर-1, पूरे भारत में सबसे ज्यादा सरकारी स्कूल यहीं मर्ज!
भोपाल/कटनी: शिक्षा के अधिकार की बात करने वाले मध्यप्रदेश में सरकारी स्कूलों की हालत सबसे ज्यादा खराब है। शिक्षा मंत्रालय की UDISE+ रिपोर्ट 2024-25 और 2025-26 ने चौंकाने वाला खुलासा किया है।
आंकड़े क्या कहते हैं?
– 5 साल में 6,972 स्कूल बंद: 2019-20 में MP में 99,411 सरकारी स्कूल थे, 2023-24 में घटकर 92,439 रह गए। ये देश में सबसे बड़ी गिरावट है।
– हर दिन 13 स्कूल बंद, आधे से ज्यादा MP में: 2025-26 में पूरे भारत में 4,791 स्कूल बंद हुए, जिसमें अकेले मध्यप्रदेश में 2,426 स्कूल बंद हुए – मतलब देश में बंद हुए हर 2 में से 1 स्कूल MP का है।
– नाम दिया “युक्तियुक्तकरण“: सरकार इसे CM Rise / संदीपनी विद्यालय योजना बता रही है, कम छात्र वाले स्कूलों को 1 KM के दायरे में मर्ज किया जा रहा है। b2423945

दूसरी तरफ – मधुशाला का विस्तार!
– प्रदेश में अभी 3,600 कंपोजिट शराब दुकानें और 460-470 बार चल रहे हैं।
– 2024-25 में आबकारी विभाग ने 13,914 करोड़ का रिकॉर्ड राजस्व कमाया, जो पिछले साल से 12.63% ज्यादा है।
– सरकार अब “Low Alcoholic Beverage Bar” खोल रही है, जिससे बार की संख्या और तेजी से बढ़ेगी।
सवाल जो निडर आवाज उठाएगा:
जब गाँव-गाँव में सरकारी स्कूलों को मर्ज कर बच्चों को 3-5 KM दूर भेजा जा रहा है, तो हर गली-मोहल्ले में शराब दुकान का लाइसेंस कैसे आसानी से मिल रहा है?

एक तरफ 79.3 लाख छात्र सरकारी स्कूलों में बचे हैं (2010 में 133.6 लाख थे), दूसरी तरफ आबकारी राजस्व हर साल 1500 करोड़ बढ़ रहा है।क्या सरकार को विद्यालय नहीं, मद्यालय (पैकारी) मर्ज करने की जरूरत है?
> “शिक्षा मंत्री कहते हैं – 10 से कम छात्र वाले स्कूल मर्ज होंगे, लेकिन आबकारी विभाग कहता है – हर 3 KM पर एक कंपोजिट दुकान खुलेगी। ये कैसा विकास मॉडल है?”
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