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मेहरबानी की हद: बोरा कंपनी पर FIR नहीं, नोटिस नहीं, दौरा नहीं – 4 दिन से PCB, खनिज, वन, राजस्व विभाग सब फेल

बिस्तरा नर्क बना दिया: बोरा कंपनी के विस्फोट से घर कांप रहे, जीव-जंतु भाग गए - फिर भी कलेक्टर को रिपोर्ट नहीं पहुंची?

बिस्तरा उजाड़ रही बोरा कंपनी: 3 पीढ़ी से प्रदूषण, 4 दिन बीत गए पर PCB-कलेक्टर की नींद नहीं टूटी

 

 निडर आवाज न्यूज – स्पेशल रिपोर्ट 

कटनी जिले के बिस्तरा गांव में तीन पीढ़ियों से चल रही मे. एन एम दुबास कंपनी उर्फ “बोरा कंपनी” ने पूरे गांव का जीवन नरक बना दिया है। निडर आवाज ने 4 दिन पहले ग्राउंड रिपोर्ट के साथ इस कंपनी के धूल-विस्फोट, कैमूर पहाड़ियों को काटने और CSR की लूट का खुलासा किया था। लेकिन 4 दिन बीत जाने के बाद भी कटनी का प्रशासन बोरा कंपनी के सामने घुटने टेके बैठा है।

 

*4 दिन, शून्य कार्रवाई: कौन जिम्मेदार?*

खबर छपने के बाद से अब तक:

1. *मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड PCB कटनी*: सैंपल नहीं, जांच नहीं, नोटिस नहीं। अधिकारी एसी में बैठे हैं।

2. *खनिज विभाग कटनी*: लीज शर्तों का उल्लंघन, अवैध खन के आरोप, फिर भी कोई अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा।

3. *वन, राजस्व/तहसील प्रशासन*: तहसीलदार, डीएफओ, जिला खनिज अधिकारी, पटवारी को गांव जाने की फुर्सत नहीं मिली।

4. *कलेक्टर कटनी*: जनशिकायत पोर्टल और मीडिया रिपोर्ट के बाद भी कोई संज्ञान नहीं।

 

सवाल सीधा है – तीन पीढ़ी से प्रदूषण फैला रही कंपनी पर प्रशासन की इतनी मेहरबानी क्यों? फाइलें हरी हैं या जेबें?

100 मीटर पर कैमूर, गांव में मौत का साया

कंपनी परिसर से महज 100 मीटर की दूरी पर देश की ऐतिहासिक कैमूर पहाड़ियां हैं। रोजाना भीषण विस्फोट हो रहे हैं। ग्रामीणों के आरोप अनुसार विस्फोट की आवाज से घरों की दीवारों में दरारें पड़ गई हैं, बच्चों को सांस और अस्थमा की बीमारी हो रही है। गांव के आसपास के जंगली जीव-जंतु तो कब के भाग गए, अब इंसान भी पलायन की सोच रहे हैं। कंपनी गेट पर “रुको-देखो-जाओ” का बोर्ड टंगा है, लेकिन अंदर पर्यावरण के नियमों की धज्जियां उड़ रही हैं।

 

*मैनेजर मौन, CSR जीरो*

निडर आवाज ने मैनेजर/HR केके चंद्रा से कई बार संपर्क किया। महाशय ने फोन रिसीव करना जरूरी नहीं समझा। ग्रामीणों का आरोप है कि तीन पीढ़ी में CSR के नाम पर बिस्तरा में कोई भी ठोस कार्य नहीं कराया गया। लूट मची है और जवाब देने वाला कोई नहीं।

दिल्ली-भोपाल को भी नहीं दिखता “बोरा का ढिंढोरा”

गांव वाले बताते हैं कि दिल्ली-भोपाल से आने वाली उच्च स्तरीय टीमों को जिला प्रशासन “बोरा कंपनी” का सच कभी नहीं दिखाता। कागज पर सब क्लीन, जमीन पर सब खत्म। ये मिलीभगत है या लापरवाही?

 

*ग्रामीण चिल्ला रहे: कोई माई-बाप है या नहीं?

बिस्तरा के लोग पूछ रहे हैं – “हम इंसान हैं या कीड़े-मकोड़े? तीन पीढ़ी से हम मर रहे हैं, प्रशासन सो रहा है। VD शर्मा जी, विधायक से उम्मीद है। लेकिन जब तक सांसद , विधायक नहीं आएंगे, क्या PCB-कलेक्टर नहीं जागेंगे?”

 

कंपनी का पक्ष:* खबर और 4 दिन बाद भी मैनेजर/HR केके चंद्रा से संपर्क नहीं हो सका। PCB, खनिज विभाग, कलेक्टर कार्यालय से भी आधिकारिक बयान नहीं मिला। पक्ष मिलने पर प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।

*निडर आवाज का सवाल:* 

कटनी प्रशासन को बताना होगा कि 4 दिन बीत जाने के बाद भी बोरा कंपनी पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई? कैमूर पहाड़ियां बचेंगी या बोरा कंपनी के विस्फोट में खत्म हो जाएंगी?

 

*नोट:* यह रिपोर्ट निडर आवाज टीम के ग्राउंड निरीक्षण, ग्रामीणों के शपथनुमा बयान और 4 दिन तक प्रशासनिक निष्क्रियता के अवलोकन पर आधारित है। लाइसेंस/NOC की सत्यता जांच रिपोर्ट से तय होगी।

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