सरकार की निंदा नहीं, जिम्मेदारी निभाई: ‘मैं आईना हूं’… मेरी अपनी जिम्मेदारी है संजय पाठक ने कटनी के लिए खोली जुबान
कटनी के लिए लड़ने वाला नेता: संजय पाठक बोले - 'पीछे रह गया हमारा जिला'

विजयराघवगढ़ विधायक ने कहा – कटनी अभी कस्बा है, रीवा-सतना से पीछे। शीर्ष नेतृत्व के सामने हिम्मत से रखी जिले की पीड़ा*
*कटनी। निडर आवाज ब्यूरो।*
श्यामा प्रसाद मुखर्जी की जयंती के अवसर पर *विजयराघवगढ़ विधायक संजय पाठक* ने जो कहा वो बयान नहीं, कटनी जिले की 10 लाख जनता की आवाज थी।
मीडिया के एक वर्ग ने इसे “सरकार की निंदा” बताने की कोशिश की, लेकिन हकीकत ये है कि *श्री पाठक ने पार्टी और सरकार को आईना दिखाया है।*
*क्या कहा संजय पाठक ने?*
श्यामा प्रसाद मुखर्जी की जयंती में आयोजित कार्यक्रम में विधायक संजय पाठक ने साफ कहा –
*”कटनी का विकास उतना नहीं हो पाया जितना पड़ोसी जिले रीवा, सतना, शहडोल, उमरिया, डिंडोरी, मंडला का हुआ है। कटनी आज भी कस्बा ही है।”*

*हिम्मत का नाम है संजय पाठक*
आज के समय में जब भाजपा के कड़े अनुशासन के चलते राष्ट्रीय से लेकर प्रदेश स्तर के नेता भी खुलकर बात नहीं करते, ऐसे में *संजय पाठक ने अपने गृह जिले के लिए मंच से आवाज उठाई।*
ये निंदा नहीं है सर। *ये जिम्मेदारी है। ये जनप्रतिनिधि का धर्म है।*
कटनी वासियों को गर्व होना चाहिए कि उनके पास संजय पाठक जैसा नेता है जो सत्ता में रहते हुए भी जिले की सच्चाई बोलने से नहीं डरता।
*क्यों जरूरी था ये बयान?*
1. *तुलनात्मक विकास*: पड़ोसी जिले मेडिकल कॉलेज, इंडस्ट्री, इंफ्रास्ट्रक्चर में आगे निकल गए। कटनी में अभी भी वही पुरानी तस्वीर।
2. *जनता की पीड़ा*: हर कटनीवासी महसूस करता है कि संभावनाओं के बाद भी कटनी को वो पहचान नहीं मिली।
3. *पार्टी को फायदा*: अंदर की कमियों को मंच से बताने वाले नेता ही पार्टी को मजबूत करते हैं। चापलूसी से विकास नहीं होता।
*निष्कर्ष: हीरो की तरह खड़े हुए*
श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने देश के लिए सच बोलने की परंपरा शुरू की थी। उसी परंपरा को *संजय पाठक ने कटनी के लिए आगे बढ़ाया।*
उन्होंने सरकार की बुराई नहीं की। *उन्होंने कटनी के भविष्य की चिंता की।* और एक सच्चे जनप्रतिनिधि से जनता यही उम्मीद करती है।
कटनी को अब कस्बा नहीं, संभाग मुख्यालय बनाने की जरूरत है। और ये आवाज अगर कोई उठा सकता है तो वो हैं संजय पाठक।
*रिपोर्ट: निडर आवाज, कटनी*
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